फिरोजपुर हवाई पट्टी धोखाधड़ी मामला हाईकोर्ट पहुंचा, सेना की ज़मीन 20 साल बाद बेची गई फर्जी तरीके से

फिरोजपुर हवाई पट्टी धोखाधड़ी मामला हाईकोर्ट पहुंचा, सेना की ज़मीन 20 साल बाद बेची गई फर्जी तरीके से

फिरोजपुर की हवाई पट्‌टी का मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा है। - Dainik Bhaskar

चंडीगढ़/फिरोजपुर: देश की रक्षा से जुड़ी ज़मीन के साथ हुए एक चौंकाने वाले धोखाधड़ी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। फिरोजपुर के फत्तूवाला गांव में स्थित उस हवाई पट्टी को, जिसका इस्तेमाल भारतीय सेना ने 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में पाकिस्तान के खिलाफ किया था, कथित रूप से धोखे से निजी व्यक्तियों को बेच दिया गया है। यह मामला अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की निगरानी में पहुंच गया है।

अदालत की सख्ती, विजिलेंस को तत्काल जांच का आदेश

हाईकोर्ट ने इस मामले को “राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत गंभीर मामला” बताते हुए पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के चीफ डायरेक्टर को व्यक्तिगत रूप से जांच कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने प्रशासन की निष्क्रियता पर भी तीखी टिप्पणी की और कहा कि “राज्य के प्रतिनिधियों द्वारा दिखाई गई ढिलाई अक्षम्य और दुर्भाग्यपूर्ण है।” अगली सुनवाई 3 जुलाई को तय की गई है।

जमीन अधिग्रहण और धोखाधड़ी की कहानी

याचिकाकर्ता रिटायर्ड कानूनगो निशान सिंह ने याचिका में बताया कि फत्तूवाला की यह ज़मीन 1937-38 में अधिग्रहित की गई थी और तब से भारतीय सेना के नियंत्रण में रही।

असल मालिक मदन मोहन लाल की मृत्यु 1991 में हो चुकी थी, लेकिन 2009-10 में, यानी उनकी मौत के लगभग 20 साल बाद, राजस्व रिकॉर्ड में फर्जी बिक्री विलेखों के ज़रिए जमीन कुछ निजी लोगों के नाम कर दी गई।

सेना का कब्जा कायम, पर रिकॉर्ड में बदलाव

भारतीय सेना ने आज तक जमीन पर से अपना कब्जा नहीं छोड़ा, और इस मामले में फिरोजपुर कैंट के कमांडेंट ने डीसी को पत्र भी लिखा था, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट ने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि “यह मामला ऐसा है जिसमें राज्य सरकार को खुद पहल कर फर्जीवाड़ा करने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए थी।”

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