जालंधर को सात साल बाद मिला नया बिशप, फादर जोस सेबेस्टियन की नियुक्ति

जालंधर को सात साल बाद मिला नया बिशप, फादर जोस सेबेस्टियन की नियुक्ति

फादर जोस सेबेस्टियन थेक्कुमचेरिकुनेल की फोटो। - Dainik Bhaskar
पोप लियो XIV ने दी मंजूरी, फ्रेंको मुलक्कल के इस्तीफे के बाद पद था खाली

जालंधर, 9 जून 2025: ईसाई समाज के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। करीब सात साल के लंबे इंतजार के बाद जालंधर को नया बिशप मिल गया है। पोप लियो XIV ने फादर जोस सेबेस्टियन थेक्कुमचेरिकुनेल को जालंधर डायोसिस का बिशप नियुक्त किया है। 63 वर्षीय फादर जोस वर्तमान में जालंधर में वित्तीय प्रशासक की भूमिका निभा रहे थे और चर्च प्रशासन में एक अनुभवी चेहरा माने जाते हैं।

फ्रेंको मुलक्कल केस के बाद से खाली था पद

यह पद 2018 में चर्च में हुए विवाद के चलते खाली हो गया था, जब तत्कालीन बिशप फ्रेंको मुलक्कल पर एक नन ने बलात्कार का गंभीर आरोप लगाया था। मामले की जांच और मुकदमे के चलते उन्हें वेटिकन द्वारा पद से हटा दिया गया था। हालांकि, बाद में कोर्ट ने फ्रेंको मुलक्कल को सभी आरोपों से बरी कर दिया, लेकिन चर्च प्रशासन ने उनका इस्तीफा ले लिया, जिसे जून 2023 में औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया।

अस्थायी जिम्मेदारी निभा रहे थे बिशप ग्रेसियस

इस बीच, बॉम्बे के बिशप एग्नेलो रूफिनो ग्रेसियस को जालंधर डायोसिस का अस्थायी प्रभारी बनाया गया था। हालांकि वे पंजाबी भाषा और स्थानीय संस्कृति से ज्यादा परिचित नहीं थे। उन्होंने फादर जोस की नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा, “मुझे खुशी है कि अब एक स्थानीय प्रीस्ट को यह ज़िम्मेदारी सौंपी गई है, जो यहां के लोगों और परंपराओं को अच्छी तरह समझते हैं।”

चर्च और समुदाय में खुशी का माहौल

फादर जोस की नियुक्ति से जालंधर के ईसाई समुदाय में खुशी की लहर है। स्थानीय चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं और समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि उनकी गहरी प्रशासनिक समझ और जमीनी जुड़ाव से चर्च में एक नई स्थिरता और दिशा आएगी।

इस नियुक्ति से न केवल चर्च में नेतृत्व का रिक्त स्थान भरा गया है, बल्कि यह विश्वास भी जताया गया है कि विवादों के बाद अब जालंधर डायोसिस एक नई शुरुआत की ओर बढ़ेगा।

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