पिता-पुत्र की जोड़ी ने बठिंडा में कृषि में नया मोड़ दिया, जैविक खेती से 10-15 लाख की सालाना आय

पिता-पुत्र की जोड़ी ने बठिंडा में कृषि में नया मोड़ दिया, जैविक खेती से 10-15 लाख की सालाना आय

अपने खेत में चमकौर सिंह और इंदरजीत सिंह। - Dainik Bhaskar

बठिंडा का एक गांव, पुहली, कृषि में बदलाव की एक प्रेरक कहानी का गवाह बन चुका है। यहां एक पिता और बेटे ने आधुनिक और जैविक खेती अपनाकर ना केवल अपनी ज़िन्दगी बदल दी, बल्कि एक नया मॉडल भी तैयार किया है, जिसे देखकर कई किसान प्रेरित हो रहे हैं।

नए रास्ते पर बाप-बेटे का संघर्ष

61 वर्षीय चमकौर सिंह, जो खुद 8वीं पास हैं, ने परंपरागत कृषि में अनुभव प्राप्त किया। उनके पास खुद की 22 एकड़ ज़मीन है, जहां वे अलग-अलग प्रकार की फसलें उगाते हैं, जैसे नींबू प्रजाति के फल (किन्नू, माल्टा, मौसमी), ड्रैगन फ्रूट, इलायची, अमरुद, आवाकाडो, अंजीर, कोदरा, देसी मक्की, देसी मूंग, गेहूं, और काली गेहूं। उनकी खेती का मुख्य उद्देश्य जैविक और रिवायती फसल चक्र को तोड़ना है।

फूलों की खेती में नया प्रयोग

2022 में, बेटे और पिता ने ड्रैगन फ्रूट की खेती की शुरुआत की, और 2025 तक इसे बढ़ाकर लगभग 3 एकड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखा। साथ ही, उन्होंने फूलों (गेंदे) की खेती की शुरुआत की, जो अब 3 एकड़ में फैली हुई है। इस खेती से 5-6 महीनों में फूलों का बीज तैयार हो जाता है, जिसे बेचकर अच्छा लाभ प्राप्त हो रहा है। फूलों की खेती से प्रत्येक एकड़ में करीब 70,000 रुपए की आय हो रही है।

किसानों के लिए एक मिसाल

चमकौर सिंह और उनके बेटे ने खेती को कम लागत, ज्यादा मुनाफा का ज़रिया बना लिया है। उनका यह आधुनिक दृष्टिकोण न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी बेहद लाभकारी है। वे सालाना 10 से 15 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं और संतुष्ट हैं कि उन्होंने खेती के पारंपरिक तरीके से अलग एक नई दिशा में कदम बढ़ाया है।

बीजों की विविधता

चमकौर सिंह के पास 35 विभिन्न किस्मों के बीज हैं, जिनमें हर किस्म की विशेषताएँ और लाभ हैं। इस प्रयोग से उन्होंने यह साबित कर दिया कि नई खेती की दिशा और जैविक तरीके न केवल फसल की गुणवत्ता को बढ़ाते हैं, बल्कि आय को भी बढ़ाते हैं।

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