पठानकोट के किसान राकेश डडवाल ने लीची की खेती में लाई नई क्रांति, लंदन-दुबई तक पहुंचा दिया अपना फल
पठानकोट, 25 अगस्त: मुरादपुर के 60 वर्षीय किसान राकेश डडवाल ने पारंपरिक खेती को छोड़कर लीची की वैज्ञानिक और आधुनिक खेती के जरिए अपनी किसानी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से पोस्ट ग्रेजुएट डडवाल ने अपनी शुरूआती रुचि को व्यवसाय में बदलकर न केवल आर्थिक रूप से सफल हुए हैं, बल्कि अब उनका फल लंदन और दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहा है।
परिवार की चौथी पीढ़ी आगे बढ़ा रही खेती राकेश डडवाल के परिवार की चौथी पीढ़ी अब इस खेती को और भी ज्यादा आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से विकसित कर रही है। वे देहरादून और कलकतिया जैसी उच्च गुणवत्ता वाली लीची की वैरायटी उगाते हैं, जो बाजार में खूब पसंद की जाती है। उनके बागान में आम, अमरूद और अन्य फलों की भी खेती की जाती है।
80 एकड़ में फैला फलों का बागान डडवाल के पास लगभग 80 एकड़ जमीन है, जहां वे 100 फीसदी फलदार पौधे लगाकर खेती कर रहे हैं। उन्होंने अपने बागान में तीन टन क्षमता वाला कोल्ड स्टोर भी स्थापित किया है, जिससे फलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके और निर्यात में आसानी हो।
शासन से भी मिला सम्मान राकेश डडवाल को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए जिला स्तर पर कई बार सम्मानित किया जा चुका है। खासतौर पर वर्ष 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के हाथों उन्हें श्रेष्ठ लीची उत्पादक का पुरस्कार मिला था। वे बागवानी विभाग के संपर्क में रहते हुए नई तकनीकों और मार्गदर्शन का लाभ उठाते हैं।
लीची की पठानकोट से जुड़ी खास विरासत राकेश डडवाल बताते हैं कि देश के पूर्व चीफ जस्टिस मेहरचंद महाजन पठानकोट में लीची की खेती के जनक माने जाते हैं। महाजन जी ने 1935 में मुजफ्फरनगर (बिहार) से लीची और आम के पौधे लाकर इस क्षेत्र में खेती की शुरुआत की थी।