पंजाब की बाढ़ त्रासदी में इंसानियत की मिसाल बने गैरी संधू, जरूरतमंद परिवारों को दीं 10 भैंसें

पंजाब की बाढ़ त्रासदी में इंसानियत की मिसाल बने गैरी संधू, जरूरतमंद परिवारों को दीं 10 भैंसें

भैंसें - Dainik Bhaskar

गुरदासपुर | 24 सितंबर 2025: पंजाब में हाल ही में आई भीषण बाढ़ ने जनजीवन को झकझोर कर रख दिया। खेत-खलिहान, घर, संपत्ति और पालतू पशु – सब कुछ इस प्राकृतिक कहर की चपेट में आ गया। लेकिन जहां एक ओर नुकसान का मातम था, वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे चेहरे भी सामने आए जिन्होंने इंसानियत और उम्मीद की मिसाल पेश की।

ऐसे ही एक नाम हैं मशहूर पंजाबी गायक गैरी संधू, जिन्होंने गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक विधानसभा क्षेत्र में बाढ़ पीड़ित परिवारों की मदद के लिए 10 उच्च नस्ल की भैंसें भेंट कीं

बाढ़ में मवेशी गंवाने वालों को मिली नई उम्मीद

गैरी संधू की टीम ने यह मदद उन परिवारों तक पहुंचाई जिनके मवेशी बाढ़ में बह गए या मारे गए थे। इन परिवारों की रोजी-रोटी का मुख्य साधन यही मवेशी थे, और उनके जाने से इनका जीवन पूरी तरह से ठहर गया था।

डेरा बाबा नानक क्षेत्र के गांव माछीवाड़ा, फतेहगढ़ चूड़ियां और आसपास के इलाकों के ग्रामीणों को यह मदद मिली। यह सिर्फ़ एक आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि एक टूटे मनोबल को फिर से उठाने की कोशिश थी।

गैरी संधू ने इस मौके पर कहा,
“मैं एक कलाकार होने से पहले एक पंजाबी हूं, और जब अपने ही लोग तकलीफ में होते हैं, तो चुप नहीं बैठ सकता। यह भैंसें सिर्फ जानवर नहीं, बल्कि इन परिवारों की दोबारा जीने की उम्मीद हैं।”


लोगों के दिलों को छू गई गैरी संधू की संवेदनशीलता

स्थानीय प्रशासन और गांववासियों ने इस सेवा कार्य के लिए गैरी संधू का धन्यवाद किया। गांव के एक बुजुर्ग किसान ने कहा:

“हमने कभी नहीं सोचा था कि कोई गायक हमारे गांव आकर हमारी ऐसी मदद करेगा। हमारी तो जिंदगी ही बदल गई।”


कौन हैं गैरी संधू?

गैरी संधू का असली नाम गुरनाम सिंह संधू है। वे एक लोकप्रिय पंजाबी गायक, गीतकार और म्यूजिक प्रोड्यूसर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ब्रिटेन से की थी और बाद में पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई।

उनके गानों में प्यार, दर्द, दिल टूटने और जिंदगी के अनुभवों की झलक मिलती है, जो युवा वर्ग को खासा पसंद आती है। लेकिन इस सेवा कार्य ने यह साबित कर दिया कि गैरी सिर्फ स्टेज पर नहीं, जमीन पर भी एक सच्चे हीरो हैं।


समाज को मिला संदेश – “मुसीबत में कोई अकेला नहीं”

गैरी संधू का यह कार्य न सिर्फ राहत पहुंचाने वाला है, बल्कि यह एक संदेश भी है – कि जब पूरा समाज साथ खड़ा होता है, तो कोई भी त्रासदी इतनी बड़ी नहीं होती कि उसे पार न किया जा सके।

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