पंजाब में बढ़ते कैंसर के बीच किसान हरविंदर सिंह ने अपनाई जैविक खेती, मोटे अनाजों से मिली सफलता

पंजाब में बढ़ते कैंसर के बीच किसान हरविंदर सिंह ने अपनाई जैविक खेती, मोटे अनाजों से मिली सफलता

फसल में खड़े हरविंदर सिंह। - Dainik Bhaskar

आईसीएमआर कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम के अनुसार, पंजाब में वर्ष 2024 में कैंसर के 42,288 नए मामले सामने आए हैं, जो पिछले साल की तुलना में 7% अधिक हैं। बढ़ती बीमारियों की चिंता से प्रेरित होकर पातड़ां तहसील के दुगाल गांव के 46 वर्षीय किसान हरविंदर सिंह ने अपनी खेती में बड़ा बदलाव किया है। उन्होंने जैविक खेती को अपनाकर मोटे अनाजों की खेती शुरू की है।

शिक्षा और जागरूकता से शुरू हुआ बदलाव

हरविंदर सिंह एमए पंजाबी और उर्दू-फ़ारसी एवं ड्रामा में सर्टिफिकेट धारक हैं। उनके घर में कैंसर का अनुभव और पिता की सेहत की परेशानी ने उन्हें खेती में नई सोच अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना से जैविक खेती और मोटे अनाजों की खासियतों का प्रशिक्षण लिया।

जैविक खेती से मिली सफलता

हरविंदर ने हल्दी, तिल, मूंग, माह, मोठ, कोधरा, मूंगफली, बाजरा, ज्वार, देसी मक्की और बासमती चावल सहित कई फसलें जैविक तरीके से उगाई हैं। उन्होंने पुराने पारंपरिक तरीकों से फसल की रक्षा की, जैसे धतूरे, अश्वगंधा और नीम के पत्तों का धुआं देकर। इससे न केवल खेती बेहतर हुई, बल्कि उनकी मिट्टी और परिवार की सेहत भी सुधरी है।

भविष्य की योजनाएं

हरविंदर की योजना इस खेती को व्यवसायिक रूप देने की है। वह पंजाब एग्रो की मान्यता के लिए आवेदन कर चुके हैं, जो तीन साल की निरंतर जैविक खेती के बाद मिलती है। अगले साल उनकी तीन साल की अवधि पूरी हो जाएगी, जिसके बाद वे अपने उत्पादों को ब्रांडेड मार्का के तहत बेच सकेंगे।

किसानों के लिए मिसाल

हरविंदर सिंह की यह पहल सूबे के किसानों के लिए एक उदाहरण है, जो स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद है। उनका अनुभव दर्शाता है कि पारंपरिक और जैविक खेती के जरिए न सिर्फ खेती को सुरक्षित बनाया जा सकता है, बल्कि बीमारियों से लड़ने में भी मदद मिलती है।

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