उज्जैन. हिंदू धर्म में भगवान शिव को कल्याण का देवता माना गया है, जिनकी पूजा करने पर साधक के सभी दुख पलक झपकते दूर हो जाते हैं. सनातन परंपरा में हर दिन शिव पूजा के लिए बेहद शुभ माना गया है. यदि कोई साधक किसी शिवालय में जाकर भगवान शिव के निराकार स्वरूप यानी शिवलिंग की विधि-विधान से पूजा करता है तो उस पर देवों के देव महादेव की पूरी कृपा बरसती है.
मान्यता है कि शिवलिंग की पूजा करने पर साधक की सभी मनोकामनाएं पलक झपकते पूरी होती हैं, लेकिन ध्यान रहे कि शिवलिंग की पूजा का भी अपना एक नियम होता है. शिव पुराण में बताया गया है कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने से व्यक्ति को पुण्य फलों की प्राप्ति होती है. कई लोगों में इस बात को लेकर संशय बना रहता है कि शिवलिंग पर चढ़े हुए जल का क्या करना चाहिए. चलिए जानते हैं उज्जैन के ज्योतिष रवि शुक्ला से कि इस विषय में शिव पुराण क्या कहता है.
जल पीना शुभ या अशुभ
शिवलिंग पर चढ़े हुए जल को चरणामृत के समान माना जाता है. ऐसे में आप इस जल को प्रसाद के रूप में ग्रहण कर सकते हैं. इसका वर्णन शिव पुराण के 22 अध्याय के 18 श्लोक में भी मिलता है, जिसके अनुसार, शिवलिंग का जल पीने से व्यक्ति को कई प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है.
दिशा का जरूर रखें ध्यान
हिंदू मान्यता के अनुसार शिवलिंग पर कभी भी पूर्व दिशा की ओर मुख करके जल नहीं चढ़ाना चाहिए, क्योंकि सनातन परंपरा के अनुसार यह भगवान शिव का मुख्य प्रवेश द्वार माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार शिवलिंग पर हमेशा उत्तर दिशा की ओर मुख करके जल चढ़ाना चाहिए.
शिव पूजन में जरुर रखें परिक्रमा का ध्यान
धार्मिक मान्यता है कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद परिक्रमा न करें. ऐसा करने से पूजा का फल प्राप्त नहीं होता है. परिक्रमा करने के लिए शिवलिंग पर अर्पित जल को लांघना पड़ता है. शास्त्र में ऐसा करने की मनाही है. इसके लिए जल चढ़ाने के बाद परिक्रमा बिल्कुल न करें.
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FIRST PUBLISHED : May 1, 2024, 18:20 IST
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.










