IAS जयवीर आर्य को मिली राहत, भ्रष्टाचार मामले में नहीं चलेगा केस — सरकार ने ACB को दी कार्रवाई से रोक

चंडीगढ़, 16 सितंबर — हरियाणा के वरिष्ठ IAS अधिकारी जयवीर आर्य को भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बावजूद फिलहाल राहत मिल गई है। सरकार ने साफ कहा है कि एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा की गई कार्रवाई में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 17-A का पालन नहीं हुआ, इसलिए उन पर केस नहीं चलाया जा सकता।
क्या है मामला?
जयवीर आर्य पर आरोप था कि उन्होंने एक महिला अधिकारी का ट्रांसफर कराने के एवज में 3 लाख रुपये की रिश्वत ली। यह मामला ट्रांसफर-पोस्टिंग में भ्रष्टाचार से जुड़ा है और हरियाणा ACB ने रेड डाल कर कार्रवाई की थी।
इसके साथ ही मामले में तीन और अधिकारी शामिल थे:
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मनीष शर्मा
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संदीप घनघस (हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन)
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राजेश बंसल (जनरल मैनेजर, कॉनफैड)
इन सभी पर पोस्टिंग के बदले पैसे लेने के आरोप लगे थे। पूरे मामले की जांच एक विशेष जांच टीम (SIT) कर रही है।
सरकार ने क्यों रोकी कार्रवाई?
सरकार का तर्क है कि:
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ACB ने जयवीर आर्य पर रेड डालने या FIR दर्ज करने से पहले भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 17-A के तहत सरकारी अनुमति नहीं ली।
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यह धारा कहती है कि किसी भी सार्वजनिक अधिकारी के कार्यकाल से जुड़े निर्णयों की जांच से पहले सरकार की पूर्व अनुमति लेना जरूरी है।
इसी आधार पर सरकार ने ACB को केस चलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिससे जयवीर आर्य को बड़ी राहत मिल गई है।
क्या कहती है धारा 17-A?
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यह धारा 2018 में संशोधित भ्रष्टाचार निरोधक कानून में जोड़ी गई थी।
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इसका उद्देश्य था ईमानदार अधिकारियों को अनावश्यक जांच से बचाना।
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परंतु कई मामलों में इसी धारा का दुरुपयोग कर आरोपित अधिकारी कानूनी कार्रवाई से बच जाते हैं, जैसा कि इस केस में देखा गया।
अब क्या आगे?
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जयवीर आर्य पर केस फिलहाल नहीं चलेगा, लेकिन अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना अभी बाकी है।
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SIT की जांच जारी है और बाकी मामलों में सरकार की अनुमति के बाद कार्रवाई हो सकती है।










