राधिका कोडवानी/इंदौर. समय के साथ सभी चीजों में बदलाव आता है. तकनीकी रूप से अक्सर पुरानी चीजें नई चीजों की जगह ले लेती है.लेकिन, आज भी कुछ पुरानी ऐसी चीजे हैं जो लोगों का ध्यान खींचती हैं. जिन्हें लोग खूब पंसद करते हैं. ऐसी ही खूबसूरत और पारंपरिक चीजे देखने को मिल रही है. इंदौर के ग्रामीण हाट बाजार में.
इंदौर के ढक्कन वाला कुआ स्थित ग्रामीण हाट बाजार में ‘कला एवं शिल्प उत्सव’ मेला लगा है. इस शिल्प उत्सव में मध्यप्रदेश और आसपास के राज्यों के कई शिल्पकार और बुनकर शामिल हुए हैं. जोधपुर से आए शम्मी मोहम्मद के पास शीशम और सागवान की लकड़ी से बना कई फर्नीचर लेकर आये है. जिस पर राजस्थानी ब्रास का वर्क किया गया है. इनके पास अलमारी के साथ ही कई खूबसूरत मंदिर भी मिल जाएंगे.
देशी और शाही अंदाज पाने वालो की पसंद
शम्मी बताते हैं कि तीसरी पीढ़ी से यह फर्नीचर का व्यापार चलते आ रहा है. दादा, परदादा भी ये ही काम करते थे. आज के समय में कांच और लकड़ियों के फर्नीचर लोग सबसे ज्यादा खरीदते हैं. ऐसे में जोधपुर का फर्नीचर इंदौर में खूब पसंद किया जा रहा है. वैसे भी ये फर्नीचर इंदौर में कहीं नहीं मिलेगा. यहां टेबल कुर्सी , सोफा, अलमारी, मंदिर लाए हैं. हमारे यहां ज्यादातर वो लोग इन्हें खरीदते है. जो देशी और शाही अंदाज का अनुभव लेने चाहते हैं. क्योंकि, सभी फर्नीचर दिखने में तो सुंदर होते ही हैं. इसके साथ ही उपयोग के हिसाब से भी आराम दायक होते है.
रिटर्न और सुधारने का वारंटी
मशीनों से तैयार होने वाले लकड़ी और कांच के फर्नीचर की कीमत हजारों में होती है. लेकिन, हमारे इन फर्नीचर की कीमत उनके मुकाबले बहुत कम होती है. जिन्हें लोग आसानी से खरीद सके. हमारे यहां विशेष रूप से बैठने के लिए मुड्डे तैयार होते है. जिनमें एक छोटे साइज का और एक बड़े साइज का होता है. जिनकी किमत 2000 शुरू होती है. इसके अलावा यहां डायनिंग टेबल सेट है. जो 40 हजार रुपए से शुरू है. शीशम और सागवान की अलमारी भी है. जिस पर ब्रास और रंग से कारीगरी की गई है. इनका दाम भी 40 हजार से शुरू है. जो साइज के मुताबिक बढ़ती है. इसकी 2साल तक की वारंटी है. जिसमें खराब होने पर सुधार कर दिया जाता है या फिर बदला जा सकता है. अपने ग्राहक से कॉन्टेक्ट में होते है. किसी को भी दिक्कत नहीं होती. इसीलिए कई प्रदेशों में इस फर्नीचर को पसंद किया जाता है. इन 2 दिन में इंदौर में भी अच्छा रिस्पॉन्स मिला.
5 मई तक चलेगा ये मेला
मेले में मध्यप्रदेश से लेकर पंजाब और बनारस तक के शिल्प और बुनकरों की कला नजर आ रही है. कोल्हापूरी चप्पल, मेरठ से खादी के शर्ट, कुर्ते और नेहरू जैकेट लेकर भी कई बुनकर यहां आए हैं. ‘अनंत जीवन सेवा एवं शोध समिति, इंदौर’ द्वारा लगाया गया है. ये मेला 5 मई तक चलेगा. अध्यक्ष ज्योति कुमरावत ने बताया कि इसमें शिल्पकारों और बुनकरों के 80 स्टॉल शामिल किए हैं. यहां कोई भी कलाकार कोई भी अपनी सांस्कृतिक कला दिखाने आना चाहे, तो उनके लिए ओपन स्टेज है.
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FIRST PUBLISHED : May 2, 2024, 20:45 IST










