ISRO के पूर्व चेयरमैन डॉ. एस. सोमनाथ का पंजाब यूनिवर्सिटी में विशेष व्याख्यान: युवा स्टार्टअप्स को बताया अंतरिक्ष क्षेत्र में भविष्य

ISRO के पूर्व चेयरमैन डॉ. एस. सोमनाथ का पंजाब यूनिवर्सिटी में विशेष व्याख्यान: युवा स्टार्टअप्स को बताया अंतरिक्ष क्षेत्र में भविष्य

इसरो के पूर्व चेयरमैन डॉ. एस. सोमनाथ। - Dainik Bhaskar

चंडीगढ़, 4 अगस्त:
पंजाब यूनिवर्सिटी में आज देश के प्रतिष्ठित अंतरिक्ष वैज्ञानिक और ISRO के पूर्व चेयरमैन डॉ. एस. सोमनाथ ने एक विशेष व्याख्यान दिया। यह आयोजन यूनिवर्सिटी की चर्चित ‘कोलोकेयम सीरीज’ के तहत किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. रेनू विग ने की।

डॉ. सोमनाथ ने “भारत में स्पेस सेक्टर: बिजनेस और स्टार्टअप के मौके” विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान में भारत की प्रगति, भविष्य की योजनाओं और निजी क्षेत्र व स्टार्टअप्स की भूमिका को विस्तार से समझाया।


प्रमुख बिंदु:

स्टार्टअप्स और कारोबार पर जोर:
डॉ. सोमनाथ ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र अब केवल सरकारी एजेंसियों तक सीमित नहीं है। अब निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए बड़े अवसर हैं। उन्होंने युवाओं को स्पेस टेक्नोलॉजी में नवाचार और एंटरप्रेन्योरशिप के लिए प्रेरित किया।

ISRO के प्रमुख मिशन:
अपने कार्यकाल में उन्होंने जिन प्रमुख अभियानों का नेतृत्व किया, उनमें शामिल हैं:

  • चंद्रयान-3

  • आदित्य L1

  • INSAT-3DS

  • PSLV-C57

  • LVM3-वनवेब मिशन

  • गगनयान (मानव अंतरिक्ष मिशन)

  • स्पेस विज़न 2047

तकनीकी नेतृत्व और अनुभव:
डॉ. सोमनाथ इससे पहले VSSC और LPSC के डायरेक्टर रहे हैं। उन्होंने क्रायोजेनिक इंजन, स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) और रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल (RLV) जैसी तकनीकों पर काम किया।


कार्यक्रम की सराहना:

पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रो. देश दीपक सिंह ने बताया कि इस व्याख्यान ने छात्रों और शिक्षकों को स्पेस सेक्टर में नई संभावनाओं से अवगत कराया। उन्होंने इसे उच्च स्तरीय और प्रेरणादायक बताया।


सम्मान और उपलब्धियां:

डॉ. सोमनाथ को मिले प्रमुख सम्मान:
नेशनल एयरोनॉटिक्स अवार्ड
स्पेस गोल्ड मेडल
राज्योत्सव सम्मान
कई विश्वविद्यालयों से मानद डॉक्टरेट


पंजाब यूनिवर्सिटी और स्पेस रिसर्च:

पंजाब यूनिवर्सिटी का फिजिक्स डिपार्टमेंट और स्पेस-एस्ट्रोफिजिक्स संस्थान पहले से ही ISRO और अन्य स्पेस एजेंसियों के साथ मिलकर शोध में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

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