SGPC और अकाल तख्त साहिब के बीच तनाव: जत्थेदार रघबीर सिंह का स्पष्ट बयान

SGPC और अकाल तख्त साहिब के बीच तनाव: जत्थेदार रघबीर सिंह का स्पष्ट बयान

मीडिया से बातचीत करते हुए ज्ञानी रघबीर सिंह।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी के इस्तीफे के बाद श्री अकाल तख्त साहिब और तख्त के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह के बीच बढ़ती दूरियों को दर्शाता है। जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने एडवोकेट धामी से नैतिक आधार पर इस्तीफा वापस लेने की अपील की है। एक मीडिया साक्षात्कार में जत्थेदार ने अपने इस्तीफे की अटकलों को नकारा नहीं किया, लेकिन उनका कहना था कि जो गुरु को मंजूर होगा, वही होगा।

इस दौरान, जत्थेदार ने श्री अकाल तख्त साहिब की शक्तियों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि पहले उन्हें लगता था कि अकाल तख्त का आदेश विश्वभर के सभी सिखों पर लागू होता है, लेकिन अब उन्हें यह समझ में आया कि यह आदेश केवल अकाल तख्त की चार दीवारियों तक सीमित है।

जत्थेदार ने अपनी व्यक्तिगत पोस्ट पर भी अपनी राय दी और कहा कि किसी भी पद की गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पोस्ट व्यक्तिगत अकाउंट में डाली गई थी और उसमें शिरोमणि कमेटी को किसी तरह की आलोचना नहीं की गई थी।

जत्थेदार ने यह भी माना कि एडवोकेट धामी के इस्तीफे का कारण संभवतः दबाव हो सकता है, क्योंकि इस स्थिति में कई राजनीतिक दबाव हो सकते थे।

लेख में एसजीपीसी के सदस्यों की बैठक का भी उल्लेख है, जहां यह बताया गया कि एक्ट 1925 के तहत तख्त के जत्थेदार को नियुक्त करने और हटाने का अधिकार कमेटी के पास है। हालांकि, जत्थेदार रघबीर सिंह ने स्पष्ट किया कि जत्थेदार को हटाने का अधिकार श्री अकाल तख्त साहिब के पास है, और ज्ञानी हरप्रीत सिंह के खिलाफ की गई कार्रवाई को मर्यादा के भीतर रहकर किया जाना चाहिए।

जत्थेदार रघबीर सिंह द्वारा की गई पोस्ट में तीन प्रमुख बातें शामिल हैं:

  1. ज्ञानी हरप्रीत सिंह की हटाने की वजह: उनका मानना था कि श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को हटाने का कारण और तरीका उचित नहीं था।

  2. योजनाबद्ध माहौल बनाना: उनका कहना था कि 2 दिसंबर 2024 के बाद, सिंह साहिबान के खिलाफ एक योजनाबद्ध माहौल बनाया गया था, जिसमें पुराने पारिवारिक मामलों को गलत तरीके से पेश किया गया।

  3. तख्त साहिबानों की स्वतंत्रता पर हमला: उन्होंने यह भी कहा कि ज्ञानी हरप्रीत सिंह को पद से हटाना तख्त साहिबों की स्वतंत्रता और अस्तित्व को नुकसान पहुंचाने वाला कदम था, जिसे निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

यह स्थिति एसजीपीसी और अकाल तख्त साहिब के बीच तनाव को बढ़ा रही है और एक महत्वपूर्ण धार्मिक और राजनीतिक विवाद का रूप ले रही है।

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