Sipahi dhara history is connected with gorkha soldiers – News18 हिंदी

तनुज पाण्डे/ नैनीताल.देवभूमि उत्तराखंड के नैनीताल अंग्रेजों की पहली पसंद था, यही कारण है कि उन्होंने नैनीताल को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया था. सरोवर नगरी में कई ऐसी जगहें आज भी स्थित हैं, जो उस समय का व्यापक इतिहास समेटे हैं. नैनीताल शहर से लगभग एक किमी की दूरी पर स्थित नैनीताल जेल के पास एक पानी का धारा (स्रोत) स्थित है. स्थानीय लोग इसे सिपाही धारा के नाम से जानते हैं. इस धारा का संबंध उत्तराखंड में पानी के प्रबंधन और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जुड़ा हुआ है. वैसे तो नैनीताल में काफी प्राकृतिक जल स्रोत स्थित हैं, जो सदियों से आसपास रहने वाले लोगों की प्यास बुझाने व अन्य जरूरतों में काम आते रहे हैं, लेकिन कुछ स्रोत ऐसे भी हैं, जिनमें साल भर पानी की धारा समान रूप से बहती रहती है. इन्हीं में प्रमुख सिपाही धारा विस्तृत इतिहास समेटे अपने आप में बेहद खास है.

प्रसिद्ध इतिहासकार प्रोफेसर अजय रावत लोकल 18 को बताते हैं कि सिपाही धारा का इतिहास 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा हुआ है. 1857 में हुए विद्रोह का असर नैनीताल में ज्यादा नहीं पड़ा था, हालांकि रुहेलखंड में इसका काफी असर देखने को मिला था. रुहेलखंड के तब के कमिश्नर रहे एलेग्जेंडर समेत कई अंग्रेजों ने नैनीताल में शरण ली थी. नैनीताल के स्थानीय लोगों ने उनकी आर्थिक सहायता भी की थी. रुहेलखंड में तब के समय रोहिला का शासन था. रुहेलखंड के नवाब ने 1857 में हल्द्वानी में आक्रमण कर दिया. तब अंग्रेजों ने गोरखा सैनिकों की मदद ली और नेपाल से भी एक सैन्य बल मंगाया और इन्हीं सैनिकों ने साल 1857-58 में रोहिला को पराजित किया.

गोरखा सैनिकों से मिला नाम ‘सिपाही धारा’

उन्होंने आगे बताया कि 1858 के बाद इन गोरखा सैनिकों को नैनीताल लाया गया और तल्लीताल स्थित जीआईसी स्कूल में इनके बैरक बनाए गए, लेकिन सिपाहियों के लिए उन दिनों पानी की व्यवस्था नहीं थी. तब सिपाहियों के बैरक के पास ही एक धारा स्थित था, जहां हर समय पानी बहा करता था. इस धारा से गोरखा सैनिक पानी का उपयोग नहाने, खाना बनाने, पीने आदि के लिए किया करते थे. यही वजह थी कि इस धारा को सिपाहियों की वजह से सिपाही धारा नाम दिया गया जो आज भी इसी नाम से जाना जाता है.

इमरजेंसी में नैनीताल की प्यास बुझाता सिपाही धारा

नैनीताल का सिपाही धारा वर्तमान में सार्वजनिक इस्तेमाल में लाया जाता है. यहां से आसपास के लोग पानी की आपूर्ति करते हैं. साथ ही यहां पर तर्पण आदि भी किए जाते हैं. जब कभी भी नैनीताल में पानी की सप्लाई बाधित होती है, तो सिपाही धारा ही शहरवासियों की प्यास बुझाता है.

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