ओम प्रकाश निरंजन/कोडरमा.दुधारू पशुओं के लिए हरा चारा सबसे उपयुक्त माना जाता है. लेकिन बढ़ती गर्मी के साथ पशुपालकों को हरा पशु चारा को लेकर चिंता सताने लगी है. हरा चारा की कमी से दूध उत्पादन में भी इसका असर देखने को मिल रहा है.वहीं इससे पशुओं की सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है.
लोकल 18 से विशेष बातचीत में जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. राम सरीख प्रसाद ने बताया कि पूरे साल हरा चारा की व्यवस्था को लेकर पशुपालकों को खास किस्म के घास नेपियर और सूडान लगाना चाहिए.इससे पशुओं को पौष्टिक हरा चारा पूरे साल उपलब्ध होगा. उन्होंने बताया कि इस खास किस्म के नेपियर घास से दूध उत्पादन में बढ़ोतरी होती है. वहीं पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य में यह काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसमें कैल्शियम, फास्फोरस और प्रोटीन समेत कई पोषक तत्व होते हैं.
एक बार बुआई करने पर 4 वर्षों तक मिलेगा हरा चारा
जिला पशुपालन पदाधिकारी ने बताया कि नियमित तौर पर पशु को हरा चारा खिलाने से पशुओं में बांझपन की समस्या नहीं आती है. लोकाई स्थित विभाग के मेघा डेयरी प्लांट में काफी मात्रा में नेपियर घास लगाए गए हैं. पशुपालक वहां से भी निशुल्क नेपियर घास के टुकड़े लाकर अपने जमीन पर इसे लगा सकते हैं. एक बार नेपियर घास लगाने से तीन से चार वर्षो तक यह पूरे साल हरा चारा देता है. पशुओं को नेपियर घास खिलाने से दूध का स्वाद भी काफी बेहतर होता है.
प्रत्येक 25 दिनों में नेपियर घास की कर सकेंगे कटाई
नेपियर घास की रोपाई करने के बाद यह करीब 45 दिनों में तैयार हो जाता है. इसके बाद इसकी कटाई कर पशु को खिलाया जा सकता है. वहीं, दूसरी बार से हर 25 दिनों में यह घास तैयार हो जाता है. एक एकड़ में करीब 400 क्विंटल तक नेपियर घास का उत्पादन किया जा सकता है. नेपियर घास खाली बंजर जमीन पर भी उपजाया जा सकता है. ज्यादा वर्षा और ज्यादा ठंडा वाले क्षेत्र में इस घास का विकास सही तरीके से नहीं हो पता है.
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FIRST PUBLISHED : May 3, 2024, 15:27 IST










