अमृतसर: एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी की प्रेस कॉन्फ्रेंस — राजोआणा-हवारा की रिहाई, महंगाई भत्ता, और सिख मुद्दों पर AAP को घेरा

अमृतसर, 16 अप्रैल — शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने आज तेजा सिंह समुंदरी हॉल में आयोजित SGPC अंतरिम कमेटी की बैठक के बाद एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कई धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर स्पष्ट और मुखर रुख अपनाया।
भाई बलवंत सिंह राजोआणा और जगतार सिंह हवारा की रिहाई की मांग फिर तेज
धामी ने कहा कि SGPC एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट और प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखेगी, जिसमें भाई बलवंत सिंह राजोआणा और भाई जगतार सिंह हवारा की रिहाई की मांग दोहराई जाएगी। उन्होंने बताया कि:
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12 अक्टूबर 2010 को राजोआणा की मौत की सजा की पुष्टि हुई थी।
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31 मार्च 2012 को फांसी की तारीख तय हुई, लेकिन बाद में अपील के चलते सजा पर स्थायी रोक लग गई।
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अब SGPC इस मामले को फिर से उठाने जा रही है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंदी सिखों को राहत देने का वादा किया था, लेकिन आज तक उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
रवनीत बिट्टू पर निशाना
धामी ने केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि उन्होंने चुनावों के दौरान वादा किया था कि वे जीतने के बाद बंदी सिखों की रिहाई के लिए कोशिश करेंगे, लेकिन आज तक कोई कदम नहीं उठाया गया।
बुजुर्ग महिलाओं ने लिया अमृत संचार
धार्मिक आयोजन “खालसा साधना दिवस” के अवसर पर धामी ने बताया कि:
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13,258 बुजुर्ग महिलाओं ने अमृतसर साहिब, केसगढ़ साहिब और दमदमा साहिब में अमृत संचार लिया है।
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SGPC कर्मचारियों को 4% महंगाई भत्ता भी दिया जाएगा।
AAP पर सिख मुद्दों को लेकर सख्त टिप्पणी
धामी ने हाल ही में वायरल हुए वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस और सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज के बीच बहस हुई थी, कहा:
“आम आदमी पार्टी को सिख मुद्दों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। गुरुद्वारा एक्ट 1925 के तहत, सिखों से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा और निर्णय सिर्फ SGPC के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।”
धार्मिक आयोजनों की तैयारियां और संगत की राय
धामी ने बताया कि SGPC द्वारा:
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गुरु तेग बहादुर साहिब जी का 350वां प्रकाश पर्व बड़े श्रद्धा और सम्मान से मनाया जाएगा।
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सिख साहिबानों की नियुक्ति और सेवानिवृत्ति को लेकर संगत और धार्मिक संस्थाओं की राय मांगी गई थी।
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चूंकि कुछ संगठनों ने अभी तक जवाब नहीं दिया, इसलिए 20 अप्रैल की तिथि को आगे बढ़ाया जा सकता है।










