अमृतसर के शिमला मार्केट में बाढ़ का असर: ग्रामीण ग्राहक नहीं आने से दुकानें सूनी, कारोबार ठहर गया

अमृतसर के शिमला मार्केट में बाढ़ का असर: ग्रामीण ग्राहक नहीं आने से दुकानें सूनी, कारोबार ठहर गया

अमृतसर के रमदास, अजनाला और आसपास के गांवों में आई बाढ़ का असर न केवल ग्रामीण इलाकों में बल्कि शहर के पुतली घर स्थित शिमला मार्केट पर भी साफ नजर आ रहा है। कपड़े, मुनियारी, गिफ्ट शॉप्स और ज्वैलर्स जैसी दुकानों में कामकाज लगभग ठप हो चुका है।


ग्रामीण ग्राहक नहीं आ रहे, मार्केट हो गई सुनसान

यहां के अधिकांश दुकानदार बताते हैं कि इस मार्केट में ग्रामीण ग्राहक भारी संख्या में आते थे, खासकर बाढ़ से पहले यह मार्केट दोपहर के वक्त भीड़ से भरी रहती थी। लेकिन अब, बाढ़ के बाद यह जगह खाली-खाली और सुनसान सी लगने लगी है

दुकानदारों का कहना है कि उनका लगभग 70 प्रतिशत काम प्रभावित हुआ है। कोरोना काल के दौरान जैसी हालत थी, अब वैसी ही स्थिति फिर से बन गई है।


दुकानदारों की प्रतिक्रिया

  • जगतार सिंह (मनियारी दुकान):
    “हमारे काम पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। गांव के लोग मनियारी का सामान बड़े पैमाने पर लेकर जाते थे, जो अब बिल्कुल बंद हो गया है।”

  • अरुण अरोड़ा (फोटोग्राफी और गिफ्ट शॉप):
    “शादी के सीजन में आमतौर पर हमारे पास ग्राहक पहले से बुक रहते थे, लेकिन इस बार अभी तक कोई भी ग्राहक नहीं आया। अब हालात कोरोना के दिनों जैसे हो गए हैं।”

  • सिद्धार्थ (राधिका क्लॉथ स्टोर):
    “हमने त्योहारों को लेकर स्टॉक भी भर रखा था, उम्मीद थी अच्छा कारोबार होगा। लेकिन बाढ़ ने सब बिगाड़ दिया। गांवों में नुकसान के साथ-साथ शहर की मार्केट पर भी बड़ा असर पड़ा है।”

  • दीपक (दीपक ज्वैलर्स के मालिक):
    “ग्रामीण ग्राहक हमारे मार्केट में रोजाना 60 से 70 प्रतिशत आते थे। लेकिन 27 अगस्त से मार्केट में बिल्कुल ठहराव है।”


बाढ़ का व्यापक असर: गांव से शहर तक

बाढ़ की तबाही ने जहां गांवों की ज़मीन, फसल और जनजीवन बर्बाद किया है, वहीं इसका असर शहर के व्यावसायिक इलाकों में भी गहरा दिख रहा है। शिमला मार्केट की दुकानों में काम नहीं होने से दुकानदारों की आमदनी बंद हो गई है और बाजार की रौनक फीकी पड़ गई है।

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