आमिर खान ने ‘रंग दे बसंती’ के क्लाइमैक्स पर दिया बयान, हिंसा के बजाय बदलाव की आवश्यकता पर जोर

आमिर खान ने ‘रंग दे बसंती’ के क्लाइमैक्स पर दिया बयान, हिंसा के बजाय बदलाव की आवश्यकता पर जोर

अभिनेता आमिर खान ने अपनी फिल्म ‘रंग दे बसंती’ के बारे में एक इंटरव्यू में बात करते हुए कहा कि इस फिल्म ने उन पर और उनके दर्शकों पर गहरा प्रभाव डाला है। खासतौर पर फिल्म के क्लाइमैक्स को लेकर आमिर ने कहा कि यह एक विचारशील बदलाव था, जो उन्होंने और निर्देशक राकेश ओम प्रकाश मेहरा ने मिलकर किया। आमिर ने बताया कि ओरिजिनल क्लाइमैक्स में फिल्म के पात्रों को पकड़ लिया जाता और वे मारे जाते हैं, लेकिन उन्होंने डायरेक्टर से पूछा कि क्या ये पात्र गलत थे? अगर नहीं, तो क्यों भाग रहे थे?

आमिर ने इस पर जोर देते हुए कहा कि फिल्म में जो संदेश दिया गया, वह यह है कि हिंसा कोई समाधान नहीं हो सकती। आपको अपने देश और समाज में बदलाव लाने के लिए सक्रिय रूप से उसमें शामिल होना होगा। कोई भी देश परफेक्ट नहीं होता, और उसे परफेक्ट बनाने की जिम्मेदारी हर नागरिक की होती है। उनका कहना था, “आपको उस गंदगी में उतरकर, अपने हाथ-पैर गंदे करने पड़ते हैं। आपको सिस्टम का हिस्सा बनकर ही बदलाव ला सकते हैं।”

‘रंग दे बसंती’ फिल्म 2006 में रिलीज हुई थी, जिसमें छह युवा दोस्तों की कहानी है, जो भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों पर एक विदेशी महिला के लिए डॉक्यूमेंट्री बनाने में मदद करते हैं। इस डॉक्यूमेंट्री के दौरान वे खुद उन जिंदगियों को जीने की कोशिश करते हैं और फिल्म में युवा पीढ़ी को प्रेरित करने का संदेश था। यह फिल्म युवाओं के बीच बहुत लोकप्रिय हुई थी, क्योंकि इसमें उनके जोश और देशभक्ति का संदेश था।

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