इस गुफा में सप्त ऋषियों ने की थी तपस्या, भगवान शिव और विष्णु ने दिए थे दर्शन!

ईशा बिरोरिया/ऋषिकेश: उत्तराखंड को देवों की भूमि कहा जाता है. यहां कई सारे प्रसिद्ध मंदिर स्थापित है. वहीं उत्तराखंड में ही स्थित ऋषिकेश भी एक पावन तीर्थ स्थल है. जोकि यहां स्थापित प्राचीन मंदिर व घाटों के लिए मशहूर है. देश विदेश से लाखों की संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं. वहीं यहां के मंदिर और घाटों के साथ ही यहां की प्राचीन गुफाएं भी काफ़ी मशहूर हैं. उन्हीं में से एक गुफा के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं. इस गुफा का नाम है झिलमिल गुफा.

झिलमिल गुफा ऋषिकेश से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक प्राचीन गुफा है. जिसका इतिहास काफी पुराना है. इस गुफा में कई प्रसिद्ध साधुओं ने तपस्या की है. साथ ही कई देवों ने इस गुफा में दर्शन भी दिए हैं. ऋषिकेश के शोरगुल और भीड़ भाड़ से दूर स्थित ये गुफा ध्यान का एक अच्छा केंद्र है. लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान इस गुफा में मौजूद साधु धीरू ने बताया कि इस गुफा में सप्तऋषियों ने तप किया है. साथ ही साथ भक्त ध्रुव ने तप किया है. पुराणों में ऐसा वर्णन है कि बाबा गोरखनाथ ने इस गुफा में धुना स्थापित कर भगवान शिव की हजारों वर्ष तपस्या की थी. जलते हुए धुने के कारन गुफा काली पड गयी थी. इस जगह पर स्वयं भगवान शिव और बाबा गोरखनाथ ने एक साथ दीर्घ काल तक योग चर्चा की थी.

सप्तऋषियों की तपोस्थली है ये गुफा

धीरू ने बताया कि इस गुफा को भक्त ध्रुव और सप्तऋषियों की तपोस्थली भी कहा जाता है. इस गुफा का निर्माण किसी मानुष द्वारा नहीं किया गया है. ये गुफा प्राकृतिक गुफा है. जिसका इतिहास सतयुग काल का बताया गया है. इस गुफा में भक्त ध्रुव की घोर तपस्या देख भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए थे. इसके साथ ही भगवान शिव ने यहां दर्शन दिए हैं. उन्होंने बताया कि यह कई ऋषि मुनियों की तपोस्थली है. जिस वजह से यहां पहुंचकर आप एकदम शांति का अनुभव कर सकेंगे.

कैसे पहुंचें झिलमिल गुफा

अगर आप नीलकंठ महादेव मंदिर जाते हैं, तो एक बार झिलमिल गुफा भी जरूर जाएं. माता पार्वती के मंदिर से आपको घने जंगलों के रास्ते 3 km पैदल ही जाना होगा. उबड़ खाबड़ वाले इस रास्ते में काफी सन्नाटा छाया रहता है.रास्ते में कुछ गांव जिनमें कुछ दुकानें देखने को मिल जाएंगी. जैसे ही आप गुफा में प्रवेश करोगे, तो आपकी सारी थकावट एक दम से दूर हो जाएगी. ऐसा कहते हैं कि गुफा में इष्ट का ध्यान लगाने से उसकी सारी समस्या हल हो जाती है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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