नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट ने हरियाणा सिविल सेवा (न्यायिक) प्रारंभिक परीक्षा, 2017 के प्रश्न पत्र कथित तौर पर लीक होने से संबंधित मामले में कार्यवाही पूरी करने के लिए एक निचली अदालत को और तीन महीने का समय दिया है. इससे पहले, यह निर्देश दिया गया था कि मामले की सुनवाई दैनिक आधार पर की जाए.
न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने कहा कि हाईकोर्ट सराहना करेगा, यदि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मामले की सुनवाई रोजाना सुनते हैं और केवल अपरिहार्य कारणों से दोनों पक्षों को स्थगन प्रदान करते हैं. हाईकोर्ट ने जनवरी में निचली अदालत को मामले की कार्यवाही में तेजी लाने और इसकी सुनवाई दैनिक आधार पर करने को कहा था.
पिछले आदेश के अनुसार, निचली अदालत के न्यायाधीश ने हाईकोर्ट को एक पत्र सौंपा, जिसमें कहा गया है कि मामले का विवरण बहुत बड़ा है क्योंकि मुकदमे का सामना कर रहे आरोपियों के खिलाफ सात आरोप पत्र दाखिल किये गए हैं. निचली अदालत के न्यायाधीश ने पत्र में कहा कि मामले में 19 आरोपी और 85 गवाह हैं. उन्होंने मामले के निस्तारण के लिए कम से कम छह महीने का समय मांगा.
केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रहे विशेष लोक अभियोजक चरणजीत सिंह बख्शी और वकील अमित साहनी ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद मामले को दैनिक आधार पर नहीं सुना गया. उन्होंने हाईकोर्ट से निचली अदालत को ऐसा करने का निर्देश देने का आग्रह किया.
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि निचली अदालत के न्यायाधीश के पत्र से संकेत मिलता है कि पिछले आदेश के बाद मामला आगे बढ़ गया है. हाईकोर्ट ने कहा, ‘केवल कुछ अपरिहार्य कारणों से ही स्थगन दिया जा सकता है. इसलिए ग्रीष्मावकाश को छोड़कर तीन महीने का और समय दिया जाता है. निचली अदालत को इस समय-सीमा के भीतर मामले का निस्तारण करने का निर्देश दिया जाता है.’ मामले की अगली सुनवाई नौ सितंबर के लिए सूचीबद्ध की जाती है.
दिल्ली हाईकोर्ट पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व रजिस्ट्रार (भर्ती) बलविंदर कुमार शर्मा द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिन्होंने एक गवाह से जिरह के लिए दस्तावेज तलब करने की उनकी अर्जी खारिज करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी है. प्रश्न पत्र लीक से जुड़े मामले में 2017 में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी.
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FIRST PUBLISHED : May 4, 2024, 17:42 IST










