करेला भी मीठा लगेगा जब देगा लाखों की कमाई, एक जमीन में हो सकती हैं 5 किस्म, वैज्ञानिकों के टिप्स अपनाएं

रिपोर्ट-कुमार
समस्तीपुर.अगर आप भी नगद आमदनी वाली फसल की खेती करने की सोच रहे हैं तो ये खबर आपके लिए है. करेले की खेती से किसानों की आमदनी काफी बढ़ेगी. किसान जून महीने में इसकी बुवाई कर फसल की अच्छी पैदावार कर सकते हैं. समस्तीपुर की जलवायु के लिए पांच तरह के करेले की खेती हो सकती है. करेले की फसल लगाने का साल में दो उत्तम समय हैं फरवरी- मार्च और जून-जुलाई.

बिहार की मिट्टी और आबोहवा पूसा विशेष, सोलन पूसा-2, कल्याणपुर बारहमासी, काशी हरित और सफेद काशी उर्वशी किस्म के करेले की खेती के लिए उपयुक्त है. इन किस्म के करेले की बीज की बुवाई करते हैं तो अच्छी पैदावार होने की संभावना बनी रहती है. करेले की फसल लगाने के लिए साल में दो मौके उत्तम हैं. फरवरी- मार्च और जून-जुलाई.

खेत तैयार करने की विधि
विशेषज्ञ ने बताया करेले की खेती करने के लिए पहले जमीन की रोटावेटर या कल्टीवेटर से जुताई करके, खरपतवार हटाएं. अगर आप जून जुलाई में खेती करते हैं, तो बरसात का सीजन आ जाता है. उस समय सड़े गोबर का ज्यादा से ज्यादा खेत में प्रयोग करें. प्रति हेक्टेयर 20 से 25 टन सड़ा गोबर डालें. फास्फोरस प्रति हेक्टेयर 80 से 100kg और पोटाश की मात्रा 80 से 100 केजी करें.

खेती का सही तरीका
डॉ.राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के हॉर्टिकल्चर विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर उर्जित कुमार ने बताया किसान साल में दो मौसम में करेले की खेती कर सकते हैं. बसंत कालीन के लिए फरवरी मार्च माह में ही करेले की बुवाई करना होता है. जुन-जुलाई महीने में भी किसान इसकी खेती कर सकते हैं. बीज दर की बात करें तो प्रति हेक्टेयर तीन से चार केजी की जरूरत होती है. 1.50× 2 मीटर की दूरी पर बीज की बुवाई की जा सकती है. 60 सेमी से 1 मीटर की दूरी पर पौधे लगा सकते हैं.

समय पर करें बीमारी की पहचान
विशेषज्ञ डॉक्टर उर्जित कुमार ने कहा पाउडरी मिल्ड्यू बैक्टीरिया लगने की वजह से करेले की बेल और पत्तियों पर सफेद गोलाकार जाल फैल जाता है, जो बाद में कत्थई रंग का हो जाता है. इस रोग में पत्तियां पीली हो जाती हैं और फिर सूख जाती हैं. करेले की फसल को इस रोग से सुरक्षित रखने के लिए 5 लीटर खट्टी छाछ में 2 लीटर गौमूत्र और 40 लीटर पानी मिलाकर छिड़काव करते रहना होगा. हफ्ते में एक बार छिड़काव करें. लगातार तीन सप्ताह तक छिड़काव करने से बेल पूरी तरह सुरक्षित हो जाती है और बढ़िया फलने लगती है.

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