पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने विदेशी नागरिकों को दी चेतावनी, भारतीय अदालतों का इस्तेमाल न करने की सलाह

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने विदेशी नागरिकों को दी चेतावनी, भारतीय अदालतों का इस्तेमाल न करने की सलाह

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - Dainik Bhaskar

चंडीगढ़, 24 अप्रैल 2025 — पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए विदेशी नागरिकों को चेतावनी दी कि वे भारतीय अदालतों का इस्तेमाल अपने देश की अदालती प्रक्रिया से बचने के लिए न करें। कोर्ट ने यह टिप्पणी एक चार वर्षीय बच्चे की कस्टडी के मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें एक कनाडाई महिला ने अपने बेटे को भारत से वापस लाने की मांग की थी।

मामला क्या है?

यह याचिका एक कनाडाई महिला ने दाखिल की थी, जिसका बेटा कनाडाई नागरिक पिता द्वारा भारत लाया गया था। बच्चे के माता-पिता दोनों ही विदेशी नागरिक हैं और अब वे अलग हो चुके हैं। कनाडा की अदालत ने पिता को केवल दो से तीन हफ्तों के लिए बच्चे को भारत लाने की अनुमति दी थी, लेकिन पिता ने उसे वापस नहीं लाया और इसके बजाय, उसने भारत में बच्चे की स्थायी कस्टडी के लिए मामला दर्ज कर दिया।

फोरम शॉपिंग पर टिप्पणी

हाई कोर्ट ने इसे ‘फोरम शॉपिंग’ का मामला करार दिया, जो एक ऐसा तरीका है, जब कोई व्यक्ति एक सुविधाजनक अदालत चुनता है, ताकि उसे अपने पक्ष में फैसला मिल सके। अदालत ने इसे गलत इरादों के साथ किया गया कदम बताते हुए कहा कि यह न्यायिक अधिकार क्षेत्र में छेड़छाड़ का प्रयास है, जिसे भारतीय अदालतें न तो स्वीकार करेंगी और न ही सहन करेंगी।

कनाडा की अदालत का आदेश और अदालत की प्रतिक्रिया

कनाडा की ओंटारियो फैमिली कोर्ट ने नवंबर 2024 में मां को बच्चे की कस्टडी देने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा कि पिता का बच्चे को वापस न लाना कनाडा की अदालत के आदेश का उल्लंघन है और बच्चे के हित में भी नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि बच्चे को भारत में रखना अवैध है और इससे कानून के शासन, अंतरराष्ट्रीय नियमों और बच्चे के भले के खिलाफ है।

बच्चे के सर्वोत्तम हित में निर्णय

अदालत ने कहा कि मां की देखभाल बच्चे के लिए सबसे उपयुक्त है, चाहे पिता कितना भी अच्छा और योग्य क्यों न हो। बच्चे के लिए मां का स्वाभाविक स्नेह और देखभाल अधिक उपयुक्त मानी जाती है, विशेषकर जब बच्चा बहुत छोटा हो या उसकी सेहत कमजोर हो। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार ऐसे मामलों में कानूनी अधिकारों से ज्यादा बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

अदालत की सख्त टिप्पणी

यह मामला न केवल परिवारिक विवादों का महत्वपूर्ण उदाहरण है, बल्कि फोरम शॉपिंग के खिलाफ अदालत की सख्त प्रतिक्रिया को भी दर्शाता है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय अदालतें विदेशी अदालतों के आदेशों का उल्लंघन सहन नहीं करेंगी और ऐसे प्रयासों को नकारा कर दिया जाएगा।

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