पंजाब में नगर परिषद चुनावों की समयबद्धता पर हाईकोर्ट की सख्त प्रतिक्रिया, 2 मार्च को चुनाव की घोषणा

पंजाब में नगर परिषद चुनावों की समयबद्धता पर हाईकोर्ट की सख्त प्रतिक्रिया, 2 मार्च को चुनाव की घोषणा

पंजाब राज्य के चुनाव आयोग और राज्य सरकार पर चुनाव प्रक्रिया को सही समय पर संपन्न कराने का दबाव था, खासकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद।

पंजाब के 43 नगर परिषदों और पांच नगर निगमों के चुनाव समय पर नहीं होने से नागरिकों को विकास कार्यों में रुकावट का सामना करना पड़ा था। यह समस्या अदालत में उठाई गई, और हाईकोर्ट ने तत्काल चुनाव करवाने का आदेश दिया था। हालांकि, पंजाब सरकार ने इसे चुनौती दी और सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवंबर को आदेश दिया कि पंजाब सरकार को कुल 10 सप्ताह में चुनाव कराना होगा और अगले 8 सप्ताह में चुनाव प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद कुछ नगर परिषदों के चुनाव हुए, लेकिन तरनतारन, डेरा बाबा नानक और तलवाड़ा के चुनावों में देरी हुई।

हाईकोर्ट ने जब यह पाया कि चुनाव प्रक्रिया में और देरी हो रही है, तो एडवोकेट भीष्म किंगर ने जनहित याचिका दायर की। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और चुनाव आयोग को कड़ी फटकार लगाई और यह कहा कि लोकतंत्र का मजाक नहीं उड़ाया जा सकता। अदालत के आदेश के बाद, पंजाब राज्य चुनाव आयोग ने 2 मार्च को इन तीन नगर परिषदों के चुनाव करवाने का फैसला लिया और यह भी सुनिश्चित किया कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से हों।

नामांकन प्रक्रिया 17 फरवरी से शुरू होगी और 20 फरवरी तक चलेगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि चुनाव में पूरी पारदर्शिता रहे, इसके लिए चुनाव प्रक्रिया पर कैमरों से निगरानी रखी जाएगी और पुलिस के कड़े इंतजाम होंगे।

यह घटनाक्रम चुनाव प्रक्रिया की समयबद्धता और प्रशासन की जिम्मेदारी को लेकर अदालत की सख्त भूमिका को दर्शाता है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की स्थिरता और प्रभावशीलता सुनिश्चित की जाती है।

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