पांवटा साहिब में बीजेपी के नारों पर सिख समुदाय भड़का, माफी की मांग के साथ दी चेतावनी

पांवटा साहिब, हिमाचल प्रदेश — पांवटा साहिब में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान लगाए गए “चीमा-कीमा नहीं चलेंगे” जैसे नारों पर सिख समुदाय में गहरा आक्रोश फैल गया है। सिख समुदाय का कहना है कि यह नारा सिख पहचान और भावनाओं का अपमान है, जिससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
किस बात पर भड़का विवाद?
बीजेपी कार्यकर्ताओं ने यह नारा कथित रूप से एसडीएम गुंजित सिंह चीमा के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान लगाया था। हालांकि, यह नारा सिख समुदाय को उनके नाम, पहचान और धर्म से जोड़कर अपमानजनक लगा, जिससे विवाद गहराता चला गया।
सिख समुदाय की तीखी प्रतिक्रिया
घटना के बाद सिख समुदाय के सैकड़ों लोग पांवटा साहिब गुरुद्वारा परिसर में एकत्र हुए और कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर दो दिनों के भीतर भाजपा नेता और कार्यकर्ता सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते, तो वे राजनीतिक और कानूनी कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
भाजपा नेताओं की सफाई
सिख समुदाय के आक्रोश को देखते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को सार्वजनिक तौर पर सफाई देनी पड़ी:
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पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा:
“मैंने पांवटा साहिब की जनसभा में किसी भी समुदाय के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की। मेरी गुरु गोविंद सिंह जी और सिख धर्म के प्रति अगाध श्रद्धा है। किसी की भावना को ठेस पहुंचाना मेरा उद्देश्य नहीं था। मेरी बात को गलत न समझा जाए।”
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा:
“अगर मेरे व्यवहार या शब्दों से किसी सिख भाई को ठेस पहुंची हो तो मैं खेद प्रकट करता हूं।”










