प्रज्वल रेवन्ना, सीएए, लव जिहाद और लोकसभा चुनावों पर खुलकर बोले अमित शाह, पढ़ें पूरा इंटरव्यू

सवाल: अमित जी, न्यूज18 नेटवर्क को यह एक्सक्लूसिव इंटरव्यू देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद. हम आपके शहर में हैं. आपकी कॉन्स्टीट्यूएंसी गांधीनगर है. हम साबरमती रिवरफ्रंट पर हैं. आप कह रहे थे कि आप ही ने इसके क्रूज का उद्घाटन भी किया. तो शुरुआत करते हैं… अगर आप पहले दो चरणों को देखें तो वोटर टर्नआउट थोड़ा कम रहा है. कुछ राज्यों में 5-6 प्रतिशत नीचे रहा है. तो 400 पार का आपका नारा है, 370 भारतीय जनता पार्टी. तो क्या गाड़ी पटरी पर है?

अमित शाह: बिल्कुल पटरी पर है. आप परिणाम के दिन देख लीजिएगा, साढ़े बारह बजे के पहले एनडीए 400 पार कर जाएगी. नरेंद्र मोदी जी फिर से प्रधानमंत्री बन जाएंगे. जो लोअर टर्नआउट है इसके बहुत सारे कारण हैं. 12 साल के बाद मतदाता सूची का नवीनीकरण हुआ है. दूसरा कारण है सामने से कोई लड़ाई ही नहीं है. जिसके कारण टर्नआउट पर एक प्रकार से असर होता है. मगर हमारी पार्टी की टीम ने, मैंने स्वयं बहुत डिटेल एनालिसिस किया है. हम दो चरण में 100 पार करके 100 से कहीं अधिक सीटें जीत के साथ आगे बढ़ रहे हैं. तो मुझे 400 पार के लक्ष्य में कोई दिक्कत दिखाई नहीं पड़ती.

सवाल: कौन से ऐसे मुद्दे हैं जिनको लेकर भारतीय जनता पार्टी तीसरी बार लोगों के बीच जा रही है. संक्षेप में बताएं कि किन उपलब्धियों को लेकर आप जनता के बीच उतर रहे हैं?

अमित शाह: देखिये, सबसे पहले इस देश में आतंकवाद और नक्सलवाद, ये दो ऐसी समस्याएं थीं, जो कई दशकों से देश के विकास के लिए नासूर बनी हुई थीं. नरेंद्र मोदी जी ने 10 साल के अंदर लगभग-लगभग आतंकवाद से शत-प्रतिशत निजात पाई है और नक्सलवाद के लिए आप कह सकते हैं कि 95 प्रतिशत तक इसको समाप्त कर दिया है.

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आज बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र… इन 7 राज्यों से नक्सलवाद पूर्ण रूप से समाप्त हो चुका है. छत्तीसगढ़ के 4 जिलों में बचा है. वहां पर भी अब भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है और विगत 3 महीनों के अंदर ही लगभग 100 नक्सलवादी मारे गए हैं. मुझे पूरा विश्वास है कि मोदी जी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद एक-दो साल में ही देश नक्सलवाद से मुक्ति पा लेगा.

दूसरा बड़ा मुद्दा है- देश की इकोनॉमी सब दृष्टि से चरमराई हुई थी. पॉलिसी बनती ही नहीं थी. उत्पादन की गतिविधियां मंद पड़ गई थीं. निर्यात औंधे मुंह गिर रहा था. देश के सभी सार्वजनिक बैंकों की बैलेंसशीट भी न बन पाए अगर सच में बनाने जाएं. इस प्रकार की स्थिति थी. महंगाई आसमान को छू रही थी और कुल मिलाकर बजट के सोलह के सोलह पैरामीटर्स निगेटिव दिखाई दे रहे थे. 10 ही साल में मोदी जी ने इस परिदृश्य को पूर्णतया बदला है. शेयर बाजार आज आसमान को छू रहा है. एफएफआई की सेलिंग के बाद भी भारतीय म्यूचुअल फंडों ने बाजार को ताकत दी है. पीएलआई स्कीम और एक मजबूत इको सिस्टम के कारण भारत फेविरिट डेस्टिनेशन मैन्यूफैक्चरिंग के लिए पूरी दुनिया में नंबर एक बना है. हमारे बच्चे स्टार्टअप हर रोज रजिस्टर कर रहे हैं. हमारी कंपनियां पेटेंट हर रोज रजिस्टर कर रही हैं. ढेर सारे स्वरोजगार के अवसर पैदा हुए हैं. सभी के सभी बैंकों की बैलेंसशीट आज बहुत अच्छी बन चुकी है. इंडस्ट्रियल ग्रोथ के जितने भी पैरामीटर्स हैं, वह 25 साल के टॉप मोस्ट मार्किंग पर हैं. एक्सपोर्ट रिकॉर्ड तोड़कर आगे ही बढ़ता जा रहा है.

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इसी प्रकार से हम कुछ क्षेत्रों में आने वाले 25 सालों तक दुनिया भर की इकोनॉमी को ड्राइव करने वाले हैं. उन सभी क्षेत्रों में भारत आज पायोनियर बन चुका है. जैसे ग्रीन हाइड्रोजन मैन्यूफैक्चरिंग, थोड़े लेट हैं, मगर सेमी कंडक्टर, इलेक्ट्रिकल मोटर व्हीकल मोटर, बैटरी का उत्पादन, अंतरिक्ष का क्षेत्र. लेट होने के बावजूद मैं फिर से कहना चाहूंगा डिफेंस भी. इस प्रकार के कई क्षेत्रों के अंदर, जो आने वाले 25 साल तक दुनिया की इकोनॉमी की दिशा और दशा तय करने वाले हैं. वहां आज भारत एक मजबूत फाउंडेशन डाल चुका है और इस फाउंडेशन पर एक बड़ी इमारत बननी है. तो देश की इकोनॉमी भी सुधरी है, सुरक्षित भी हुआ है. देश 11वें का अर्थतंत्र था, आज 5वें नंबर का अर्थतंत्र बना है.

गांव हो या शहर, जंगल हो या रेगिस्तान, सागर किनारा हो या शहर हो… हर जगह इंफ्रास्ट्रक्चर के डेवलपमेंट के काम हो रहे हैं. आज 10 लाख करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्चा भारत के बजट में आम बात है. जीएसटी कलेक्शन और डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन अपने सारे रिकॉर्ड स्वयं ही तोड़ते जा रहे हैं. देश के अंदर सीमाओं को चाक-चौबंद करने का काम भी नरेंद्र मोदी जी ने बहुत अच्छे तरीके से किया है. जनता में भारत का भविष्य उज्ज्वल है इस प्रकार के विश्वास का निर्माण करने की नेतृत्व की जो जिम्मेदारी है, नरेंद्र मोदी जी को इसमें बहुत अच्छी तरीके से सफलता मिली है. आज पूरे 130 करोड़ लोग, हम विश्व में सर्वप्रथम बन सकते हैं, इस आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं. हायर एजुकेशन हो, नई इकोनॉमिक पॉलिसी हो या फिर राम जन्मभूमि, अनुच्छेद 370 हटाना, ट्रिपल तलाक समाप्त करना, यूसीसी हो या देश के क्रिमिनल लॉ के अंदर आमूलचूल परिवर्तन करना हो… हर क्षेत्र के अंदर ये 10 साल स्वर्णिम अक्षरों से लिखे जाने वाले 10 साल हैं. जनता भी ये फील कर रही है कि कोरोना जैसी महामारी से इतनी अच्छी तरीके से लड़ा जा सका, वह केवल और केवल नरेंद्र मोदी जी का नेतृत्व है.

सवाल: पिछले कुछ महीनों से सरकार इकोनॉमी की बात कर रही थी, डेवलपमेंट की बात कर रही थी, जो चीजें आपने अभी बताईं, इसकी बात करके जनता के बीच जा रही थी. पहले चरण के बाद यह देखा गया कि थोड़ा ये तुष्टीकरण की ओर मुड़ा, थोड़ा हिंदू- मुसलमान हुआ. आप लोगों ने कांग्रेस के मैनिफेस्टो पर अटैक किया. प्रधानमंत्री ने राजस्थान की एक रैली में कहा कि कांग्रेस के मैनिफेस्टो में अर्बन नक्सल की महक है. इसमें माओइस्ट खयाल दिखाई देता है. तो यह कहां से आया?

अमित शाह: देखिये हमारा दायित्व है कि हमारे खिलाफ जो चुनाव लड़ रहे हैं, इनकी मंशाओं को हम उजागर करें. आप मुझे बताइए इस जमाने में कोई भी पॉलिटिकल पार्टी पर्सनल लॉ की बात कर सकती है क्या, क्या देश शरिया के आधार पर चलेगा? एक ओर हम अपने घोषणापत्र के अंदर संकल्पपत्र के अंदर कह रहे हैं कि हम यूनिफॉर्म सिविल कोड लाएंगे और कांग्रेस कह रही है कि हम पर्सनल लॉ को प्रमोट करेंगे. कांग्रेस पार्टी को जवाब देना चाहिए. बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है.

सवाल- तो इसलिए आप कह रहे हैं कि मुस्लिम लीग की छाप है?

अमित शाह: बिल्कुल मुस्लिम लीग की छाप है. आप मुझे बताइए. वो कह रहे हैं कि देश के कॉन्ट्रैक्ट्स में माइनॉरिटी को प्रायरिटी देंगे. कॉन्ट्रैक्ट्स फर्स्ट पुअरेस्ट कौन है? पास्ट परफॉर्मेंस क्या है? काम करने की क्षमता है या नहीं है? इसके आधार पर निर्धारित होंगे या कॉन्ट्रैक्टर के धर्म के आधार पर निर्धारित होंगे? किस तरह ये देश चलाना चाहते हैं? देश की जनता को इसको सोचना पड़ेगा. बहुत समय बाद देश को तुष्टीकरण की राजनीति से नरेंद्र मोदी जी बाहर निकालकर लाए हैं. ये फिर से उसी दिशा में ले जा रहे हैं क्योंकि कांग्रेस जीतने का आत्मविश्वास गंवा चुकी है.

सवाल: प्रधानमंत्री ने उस रैली में यह भी कहा कि सबकी जमा पूंजी को चेक करके वेल्थ को रीडिस्ट्रीब्यूट किया जाएगा. और वेल्थ रीडिस्ट्रीब्यूट करके मुसलमानों और घुसपैठियों को दिया जाएगा. यह कहां से आता है?

अमित शाह: यह देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का बयान है. बड़ा प्रसिद्ध बयान था कि इस देश के संसाधनों पर सबसे पहला अधिकार माइनॉरिटी का और माइनॉरिटी में भी मुसलमानों का है. अब जब वेल्थ डिस्ट्रीब्यूट करने की बात आती है तो संसाधन से ही होगी. सरकार लोगों की संपत्ति लेकर डिस्ट्रीब्यूट करेगी. और मैं कहता हूं कि अगर ये सच नहीं है तो कांग्रेस पार्टी बताए कि इसका मतलब क्या है?

सवाल: राहुल गांधी ने साफ-साफ कहा है कि अगर वो लोग सरकार बनाएंगे तो एक राष्ट्रीय स्तर पर एक्स-रे होगा, जिससे कि लोगों का सोशियो-इकोनॉमिक स्टेटस पता किया जाएगा. किस वर्ग, किस जाति के पास कितनी दौलत है, कितना धन है और इंस्टीट्यूशन में कितनी भागेदारी है और उस हिसाब से रीडिस्ट्रीब्यूशन होगा?

अमित शाह: तो इस हिसाब से रीडिस्ट्रीब्यूशन में इनकी प्रायरिटी तय है.

 सवाल- वह कहते हैं कि असमानता को खत्म करने का यही तरीका है?

अमित शाह: वह उनकी समझ है. मुझे लगता है इतनी पुरानी पार्टी ने अपना मैनिफेस्टो माइनॉरिटीज़ और एक्स्ट्रीम लेफ्ट आइडियोलॉजी वाले लोगों को आउटसोर्स किया है.

सवाल: जो मंगलसूत्र की बात है वह कहां से आती है?

अमित शाह: स्वभाविक रूप से जब वेल्थ आती है तो सारी चीजें शामिल होती हैं.

सवाल- इनहेरिटेंस टैक्स की बात की थी सैम पित्रोदा जी ने, उसको आप कैसे देखते हैं?

अमित शाह: देखिये मुझे लगता है कि सैम पित्रोदा एक आयवरी टॉवर में जी रहे हैं. उनको इस देश के संस्कार, इस देश की जनता का मूड और इस देश की परंपराओं से कोई लेन-देन नहीं है.

सवाल: तो आप कभी नहीं लाएंगे इस इनहेरिटेंस टैक्स को यानी विरासत टैक्स कभी नहीं लगेगा?

अमित शाह: हमने अपना संकल्पपत्र जनता के सामने पारदर्शिता के साथ रख दिया है. इसमें सारी बातें हैं. हम कुछ छिपा कर नहीं करेंगे.

सवाल: एक और बात जो चर्चा में है, वह यह है कि कांग्रेस के मैनिफेस्टो को देखते हुए आप लोग कह रहे हैं कि ये ओबीसी रिजर्वेशन को काटकर मुसलमानों को दे देंगे. इसका आधार क्या है?

अमित शाह: मैनिफेस्टो नहीं ये कर चुके हैं. कर्नाटक में उनकी सरकार थी. रातोंरात कर्नाटक के सारे मुसलमानों को बैकवर्ड बना दिया. न बैकवर्डनेस का सर्वे हुआ, न कोई कमीशन बना. धर्म के आधार पर सारे लोगों को बैकवर्ड घोषित कर दिया और उनको रिजर्वेशन भी दे दिया. अब ये रिजर्वेशन जो कटा वह ओबीसी का ही कटा है. इसी तरह से आंध्र प्रदेश में, संयुक्त आंध्र में जब उनकी सरकार थी, मुसलमानों को चार प्रतिशत रिजर्वेशन दे दिया. तो ये किसका हिस्सा कटता है? एससी-एसटी, ओबीसी का ही कटता है. जब ये बात मैंने कही कि हम धर्म के आधार पर रिजर्वेशन को समाप्त कर देंगे तो मेरे वीडियो को तोड़-मरोड़ करके जनता के सामने पेश किया.

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राहुल गांधी कांग्रेस की कमान संभालने के बाद राजनीति का स्तर लगातार गिरा रहे हैं. संसद में आप बहस नहीं कर सकते, शोर-शराबा करना, बहिष्कार कर देना, बोलने नहीं देना, डिबेट में हिस्सा नहीं लेना और बाहर निकलकर प्रेस (कॉन्फ्रेंस) करना कि हमारे साथ अन्याय हो रहा है. क्या समझते हैं देश की जनता यह सब नहीं जानती? देश की जनता ये सब चीजें बहुत अच्छी तरीके से जान गई है. लोकतंत्र में हेल्दी डिबेट होनी चाहिए. और आप लोग भी उनसे कुछ नहीं पूछते हैं. आप लोगों को भी पूछना चाहिए. मगर आप लोग सवाल हमसे ही पूछते हैं उनसे नहीं पूछते हैं.

सवाल: एक बात कास्ट सेंसस की भी है. इसी से जुड़ा हुआ सवाल है कि कास्ट सेंसस की वह बात करते रहते हैं. कहते हैं कि जितनी आबादी, उतना हक. इसको आप कैसे देखते हैं?

अमित शाह: कितने साल तक इस देश में कांग्रेस का शासन रहा. 55 साल तक रहा. कभी नहीं कराया. अब जब लगातार हार रहे हैं तब ये सारी चीजों को मोड़ रहे हैं. इनकी मंशा नहीं है. इस देश में पिछड़ा वर्ग विरोधी कोई पार्टी है तो एकमात्र पार्टी है कांग्रेस. काका साहेब कालेलकर कमीशन को इन्होंने सालों तक ओपन ही नहीं किया. मंडल कमीशन को दबा कर रखा. सेंट्रल के इंस्टीट्यूशन में ओबीसी को पिछड़ा वर्ग के लोगों को रिजर्वेशन नहीं दिया. जब मंडल कमीशन लागू हो रहा था, विपक्ष के नेता के रूप में राजीव गांधी ने 2 घंटे तक विरोध में भाषण दिया. राहुल गांधी को जरा वह भाषण पढ़ लेना चाहिए. और हमने तो देश को सबसे सफल प्रधानमंत्री पिछड़ा वर्ग से और गरीब के घर से पैदा हुआ नेचुरल लीडर नरेंद्र मोदी देने का काम किया है.

सवाल: नैरेटिव बनाने की ये कोशिश है कि 400 पार अगर आ जाएगा तो बाबा साहब का कॉस्टिट्यूशन आप बदल देंगे. उसके बाद फिर ओबीसी, एससी-एसटी के रिजर्वेशन के साथ आप लोग बदलाव करेंगे?

अमित शाह: हमारे पास 10 साल से बहुमत है. संविधान बदलने की क्षमता नरेंद्र मोदी जी को 10 साल से इस देश की जनता ने दी है. हमने क्या किया 10 साल में. हमने कभी रिजर्वेशन को समाप्त करने का प्रयास नहीं किया. हमने इस बहुमत का उपयोग अनुच्छेद 370 हटाने में किया, ट्रिपल तलाक समाप्त करने में किया. यूसीसी लाने में किया. अंग्रेजों के कानून बदलने में किया. कश्मीर के अंदर शांति लाने में किया. हमारे पास 10 साल से अधिकार है. राहुल गांधी का एक रूल है झूठ बोलो, जोर से बोलो और बार-बार बोलो. वो इसी रूल को फॉलो कर रहे हैं.

सवाल: आपको लगता है कि ये नैरेटिव इसीलिए बनता है कि वे बार-बार बोलते हैं?

अमित शाह: नहीं बनता है ये नैरेटिव. हमें 10 साल ये अधिकार मिला हुआ है.

सवाल: आपने सिक्योरिटी की बात की, आपने कहा है कि अभी हाल-फिलहाल में आप लोगों ने नक्सल पर बहुत क्रैकडाउन किया. आपने कहा है कि दो-तीन साल में छत्तीसगढ़ में भी आप नक्सलियों को समाप्त कर देंगे… तो कांग्रेस के कुछ नेताओं ने कहा कि ये शहीद हैं. इसको आप कैसे देखते हैं?

अमित शाह: देखिये तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में कहा है कि जिसका खराब समय होता है तो प्रभु राम सबसे पहले उनकी मति हर लेते हैं. कांग्रेसियों के भी साथ शायद यही समय आ गया है. हमारे जवान अपनी जान जोखिम में डालकर घने जंगलों के अंदर ऑपरेशन करके नक्सलियों को मारते हैं और नक्सल कहते हैं कि हमारा कैडर मारा गया है. और कांग्रेस पार्टी कहती है कि फेक एनाकाउंटर हैं. भगवान ही बचाएं इनको. भगवान भी शायद नहीं बचा सकता.

सवाल: आपके पिछले कार्यकाल में आप लोगों ने काफी बड़े काम किए. आपने आर्टिकल 370 को रद्द किया. आपने सीएए को लागू किया. क्रिमिनल प्रोसिजर लॉ लाए. आपने तमाम इस तरह के बड़े काम किए. मगर आज विपक्ष वाले कहते हैं कि 370 को वह वापस लाएंगे और सीएए को लागू नहीं होने देंगे. और सारे बड़े नेता ममता बनर्जी, पी. चिदंबरम ये सब इस तरह की बातें करते हैं. तो इसको आप कैसे देखते हैं?

अमित शाह: देखिये यह इनके माइनॉरिटी के वोट प्राप्त करने का टोटका है. उनको न सत्ता में आना है, न 370 को वापस आना है. न उनको सत्ता में आना है, न सीएए रद्द होना है. उनको भी मालूम है. मगर वो माइनॉरिटी तुष्टीकरण करके, माइनॉरिटी के वोट लेना चाहते हैं. इसी कारण से झूठ फैला रहे हैं. मैं देश की जनता को बताना चाहता हूं कि भारतीय जनता पार्टी का एक भी सांसद संसद में जब तक है 370 फिर से नहीं आ सकता. सीएए समाप्त नहीं हो सकता. अब 370 इतिहास का हिस्सा बन चुका है और सीएए वास्तविकता बन चुका है.

सवाल: सिर्फ आपने इसे जल्दबाजी में लागू कर दिया या इससे नागरिकता भी कुछ लोगों को मिलेगी और ये कब तक संभव होगा और इसका क्या टाइमफ्रेम है?

अमित शाह: देखिये एप्लिकेशन आनी शुरू हो गई हैं. नियम के हिसाब से इसकी स्क्रूटनी हो रही है. मुझे लगता है कि चुनाव के पहले ही, मतलब अंतिम मतदान के पहले ही नागरिकता देने की शुरुआत हो जाएगी.

सवाल: आप लोग अमित जी यूनिफॉर्म सिविल कोड की बात कर रहे हैं. कांग्रेस जो है पर्सनल लॉ की बात कर रहा है. इसको आप कैसे देखते हैं? कहीं न कहीं आप लोग अपना-अपना वोट साध रहे हैं?

अमित शाह: अपना-अपना वोट नहीं. यूनिफॉर्म सिविल कोड हमारे संविधान का मैंडेट है. गाइडिंग प्रिंसिपल जो हैं, हमारे मार्गदर्शक सिद्धांत जो संविधान ने हमारे लिए बनाए हैं. उसमें लिखा गया है कि देश के विधानमंडल और देश की संसद को उचित समय पर ये प्रयास करना होगा कि इस देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हो. मुझे लगता है कि उचित समय आ गया है. और यह आज से हम नहीं कह रहे हैं. हमारी पार्टी बनी इसके पहले घोषणापत्र में यह था कि इस देश में धर्म के आधार पर कानून नहीं होना चाहिए, यूनिफॉर्म सिविल कोड होना चाहिए. अगर यह देश पंथनिरपेक्ष है तो धर्म के आधार पर कानून कैसे हो सकते हैं. नहीं होने चाहिए.

सवाल: सलमान खुर्शीद का एक स्टेटमेंट वायरल हो रहा है. वह यह कह रहे थे कि यूपीए-1 और यूपीए-2 की सरकार जो बनी. वह सिर्फ इस वजह से बनी क्योंकि वह मुसलमानों को वापस अपने पाले में ला सकी. इसको आप कैसे देखते हैं?

अमित शाह: इसके आधार पर ही शायद उनका घोषणापत्र बना है. सलमान खुर्शीद जी ने घोषणापत्र ऐसा क्यों बनाया इसका रहस्य ही खोल दिया है. वह फिर से करना चाहते हैं. मगर उनको मालूम नहीं है कि देश की जनता जागरूक हो गई है. आपकी तुष्टीकरण की नीति अब इसलिए सफल नहीं होगी कि एक तुष्टीकरण जब आप करते हो तो दूसरा वर्ग जागृति के साथ काउंटर करने के लिए तेजी से लामबंद हो जाता है. अब ये सफल नहीं होंगे.

सवाल: इधर बीच घुसपैठियों की बात हो रही है. आपने सीएए लागू किया. मैनिफेस्टो में एनआरसी की कोई चर्चा नहीं है. ऐसा क्यों?

अमित शाह: देखिये सीएए का इंप्लिमेंटेशन कोविड के कारण लेट हुआ है. और हम मानते हैं कि पहले सीएए को जमीन पर उतारना चाहिए. वह प्रक्रिया अब चल रही है. और जहां तक घुसपैठ का सवाल है. अब देश के एक राज्य से घुसपैठ हो रही है. बंगाल से. क्योंकि ममता बनर्जी की सरकार का उस पर वरदहस्त है. वह घुसपैठियों में अपना वोटबैंक देख रही हैं. उनको घुसपैठ से राष्ट्रीय सुरक्षा खतरा नहीं दिखाई पड़ता है. उनको लगाता है कि मेरे वोट बढ़ रहे हैं. न केवल बंगाल, समग्र देश के लिए ये बहुत खतरनाक सोच है. मैं बंगाल की जनता से हृदय से अपील करना चाहता हूं कि इस बार भारतीय जनता पार्टी को सफल बनाइए. इसके बाद वहां भाजपा सरकार बनाइए. हम ऐसा बॉर्डर बनाएंगे कि परिंदा भी वहां पर नहीं मार पाएगा.

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सवाल: इसीलिए सीएए का दमखम से वह (ममता बनर्जी) विरोध भी कर रही हैं? वह कह रही हैं कि सीएए हम कभी लागू नहीं होने देंगे?

अमित शाह: उनको मालूम नहीं है कि यह केंद्र का विषय है. इसमें राज्य को कुछ करना ही नहीं है. शायद मालूम है. मगर माइनॉरिटी को गुमराह करने के लिए वह बोल रही हैं.

सवाल: 22 जनवरी को राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा हुई. ये आपका एक बहुत बड़ा वादा था, जिसको आपने निभाया. मगर विपक्ष यह कहता है कि आप इस चुनाव में राम के नाम पर वोट मांग रहे हैं.

अमित शाह: देखिये राम के नाम पर तो वोट तब मिलता था, जब मंदिर नहीं बना था और हम कहते थे कि हम बनाएंगे. हमने तो वोट लेने का कारण ही समाप्त कर दिया. विपक्ष को चिंता इसलिए है और पूरा देश उनसे नाराज इसलिए है कि जब राम मंदिर बना शांतिपूर्वक तरीके से बना. संवैधानिक रूप से बना. जब प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी इन्होंने इसका बहिष्कार किया. माइनॉरिटी के डर से वो प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा में नहीं गए. इसलिए पूरा देश उनसे नाराज है. हमने कभी कहा कि राम मंदिर बनाया इसलिए हमें वोट दीजिए. मगर पूरे देश की जनता जानती है, 70 साल से ये लोग अटका कर रखे थे. मोदी जी ने 5 ही साल में केस भी जीता, भूमि पूजन भी किया और प्राण प्रतिष्ठा भी कर दिया. आज समग्र देश को आह्लादित करने वाला भव्य राम मंदिर बना है.

सवाल: प्रधानमंत्री ने एक साल पहले पसमांदा मुसलमानों को एक आउटरीच भी किया. उनके बारे में बातचीत भी की. उनके बारे में वह सोचते भी काफी है. एक तरफ ये बात हो रही है और एक तरफ ये… इसमें कोई विरोधाभास नहीं है?

अमित शाह: जरा भी नहीं है. प्रधानमंत्री जी ने सिर्फ पसमांदा मुसलमानों को आउचरीच नहीं किया है. ट्राइबल्स को भी किया है, दलितों को भी किया है, पिछड़ा वर्ग को भी किया है, गरीबों को किया है. किसानों को किया है. मातृशक्ति को, महिलाओं को किया है. युवाओं को भी किया है. वह उनका काम है. दायित्व है. विकास की रेस में जो पिछड़े हैं, इनको सबके साथ एक लाइन में लाकर खड़ा करना ये सरकार का दायित्व है. मुझे इसमें कोई अंतर्विरोध दिखाई नहीं पड़ता.

सवाल: माहौल चुनाव का है. लोग आपके प्रिडिक्शंस पर बहुत दिनों तक बात करते हैं कि अमित जी ने पहले ये बोला था ये सही हुआ. तो कुछ स्टेट्स पर जाते हैं. गुजरात में पिछले दो चुनावों से 26 की 26 सीटें आ रही हैं तो क्या इस बार हैट्रिक करने की आपको उम्मीद है?

अमित शाह: निश्चित रूप से गुजरात में हम 26 की 26 सीटें जीतेंगे. और मार्जिन भी सब सीट पर हमारे 19 के चुनाव से ज्यादा होगा.

सवाल: यह बात चल रही थी कि क्षत्रिय जो हैं वह आप लोगों से थोड़ा रूठे हुए हैं. आपका उनके लिए कोई संदेश?

अमित शाह: देखिये हम बराबर संवाद कर रहे हैं उनसे. मुझे पूरा भरोसा है कि सब चीज़ें अपनी जगह पर ठीक होंगी. हम 26 की 26 सीटें भी जीतेंगे और हमारे मार्जिन में भी बढ़ोतरी होगी.

सवाल: कर्नाटक का चुनाव आपके लिए बहुत अहम हैं. पिछली बार आप लोगों की वहां बड़ी जीत हुई थी, विधानसभा चुनाव में आपकी हार भी हुई है. तो ऐसे में आप कर्नाटक को कैसे देखते हैं? खास करके प्रज्वल रेवन्ना का मुद्दा आज आपने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके उस पर बयान भी दिया तो जो प्रताड़ित महिलाएं हैं, उसको आप कैसे देखते हैं? क्योंकि आपका वहां उनसे गठबंधन है, क्या एलायंस के प्रेशर में आ जाएंगे आप? क्या कदम उठाएंगे आप?

अमित शाह: मैंने भारतीय जनता पार्टी का रुख स्पष्ट कर दिया है. कठोर से कठोर कदम उठाने चाहिए. मगर प्रियंका गांधी और राहुल गांधी यह कह रहे हैं कि कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं. शायद उनको मालूम नहीं है पोजीशन. स्टेट का लॉ एंड ऑर्डर राज्य सरकार को संभालना होता है. कदम उनको उठाना है. हमें नहीं उठाना है. परंतु भारतीय जनता पार्टी इस घटना की घोर निंदा करती है और किसी भी हालत में कोई भी हो, इसको सहन नहीं किया जा सकता और कठोर से कठोर उठाए जाने चाहिए. और भारत सरकार के महिला आयोग ने आज कर्नाटक स्टेट गवर्मेंट को नोटिस भी जारी किया है.

सवाल: तो एलायंस का कोई प्रेशर नहीं है. उसके दबाव में आप कभी नहीं आएंगे इस मामले में?

अमित शाह: न हम पर दबाव है. न हम दबाव में आएंगे.

सवाल: एक और कांड हुआ था नेहा हिरेमथ वाला, जिसको लव जिहाद का कलर मिला है?

अमित शाह: कलर नहीं भई. ये पक्का मामला ही लव जिहाद का है.

सवाल: यही मैं आपसे जानना चाहता था कि इस पर आप कुछ बता सकें. क्योंकि मुख्यमंत्री और होम मिनिस्टर ने कहा है कि यह पर्सनल मामला है?

अमित शाह: वह अपने माइनॉरिटी वोट बैंक के कारण ऐसा कह रहे हैं. मुझे एक बात बताइए किसी भी बच्ची को कॉलेज कैंपस में सुरक्षा मिलनी चाहिए या नहीं मिलनी चाहिए. इस तरह से हत्या होती है और उसको पसर्नल मामला बताकर इस सामाजिक दूषण से आप नजरें चुरा रहे हैं केवल वोटबैंक के लिए. उनको तो बॉम्ब ब्लास्ट होता है, वह भी गैस सिलेंडर का ब्लास्ट लगता है. जब एनआईए जांच कर लेती है तो पूरा मामला पकड़ा जाता है. बेंगलुरु में 10 साल से बम बलास्ट नहीं हुए था. इनकी सरकार जब आई, एसडीपीआई का समर्थन लिया और अब बम ब्लास्ट होने लगे. अपनी वोटबैंक की राजनीति के कारण कितने नीचे जाएंगे. देश की सुरक्षा, बेंगलुरु की सुरक्षा, कर्नाटक की सुरक्षा इसको भी कांग्रेस पार्टी ताक पर रख रही है.

सवाल: ऐसे माहौल में, जिसके बारे में हम लोगों ने अभी चर्चा की, कितनी सीटें देते हैं आप कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी और उसके गठबंधन को?

अमित शाह: देखिये अभी चुनाव होना बाकी है. मगर मुझको लगता है कि कमोबेश हम अपनी पोजीशन को बरकरार रखेंगे.

सवाल: महाराष्ट् में एक अजीब सी खिचड़ी बनी हुई है. दो दल टूटे हैं. एक टुकड़ा आपके साथ है. एक उधर है. ये कहता है हमारा ओरिजनल है, वह कहता है हमारा ओरिजनल टुकड़ा है. मगर ऐसे में क्या आपको लगता है कि उद्धव ठाकरे और शरद पवार जी के प्रति थोड़ी सहानुभूति वहां हो सकती है?

अमित शाह: देखिये महाराष्ट्र की जनता मोदी जी के साथ है. जो मोदी जी के साथ है उसको वोट मिलेगा. क्योंकि यह चुनाव देश का प्रधानमंत्री कौन बने? इस पर लड़ा जा रहा है. दो खेमे स्पष्ट हैं. एक ओर नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में एनडीए है. एक राहुल बाबा, शरद पवार, ममता जी, स्टालिन, तेजस्वी यादव, लालू यादव, इनके नेतृत्व में इंडी एलायंस है, जिनका कोई नेता ही नहीं. अब देश की जनता को तय करना है कि किस व्यक्ति को चुनना है. एक ओर 12 लाख करोड़ के घपले-घोटाले भ्रष्टाचार करने वाला इंडी एलांयस है.

दूसरी ओर 23 साल मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री रहने के बावजूद 25 पैसे का जिस पर आरोप नहीं लगा ऐसे नरेंद्र मोदी हैं. एक ओर गर्मी आते ही छुट्टी पर जाने वाला दल है. विदेश में छुट्टी पर जाने वाला, क्योंकि यहां गर्मी बहुत ज्यादा होती है. और दूसरी ओर 23 साल तक दीपावली के दिन भी छुट्टी न लेकर सरहद पर जवानों के दीपावली मनाने वाले नरेंद्र मोदी जी हैं. एक ओर अपने बेटे-बेटी, भतीजे, बहुओं के लिए काम करने वाले राजनीतिक दल हैं, दूसरी ओर देश की गरीब महिला, किसान, युवा के लिए काम करने वाले नरेंद्र मोदी हैं. तो देश की जनता को यह तय करना है कि देश को सुरक्षित करने वाला व्यक्ति चाहिए या वोटबैंक के लिए देश की सुरक्षा को ताक पर रखने वाले लोग चाहिए. देश के अर्थतंत्र को बढ़ाने वाला व्यक्ति चाहिए या अर्थतंत्र को डुबोने वाला ग्रुप चाहिए. देश की जनता ने फैसला कर लिया है. देश की जनता नरेंद्र मोदी जी के साथ है और जो दल मोदी जी साथ हैं उसको वोट देगी. यह चुनाव मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाने का चुनाव है.

सवाल: 41 सीटें थीं पिछली बार आपके गठबंधन की. इस बार?

अमित शाह: आप नतीजे आने दीजिए. आप चौंक जाएंगे. वहीं से 400 होता है. महाराष्ट्र में आंकड़ा 41 का 40 हो जाए या 42 हो जाए. कमोबेश यही परिणाम रहेगा. महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक हम शत प्रतिशत रिपीट करेंगे. उत्तर प्रदेश में हम 5 से 7 सीट की बढ़ोतरी करेंगे. ओडिशा में हम 16 के आसपास जा सकते हैं और असम में भी 12 के ऊपर चले जाएंगे. बंगाल में हम कम से कम 30 सीटें जीतेंगे.

सवाल: ओडिशा में दोस्त दोस्त न रहा. आप लोगों के रास्ते अलग हैं. वहां पर मैं प्रधानमंत्री का जब इंटरव्यू कर रहा था तो उन्होंने कहा कि ये ओडिशा की अस्मिता पर सवाल है इस बार. तो आप इसको कैसे देखते हैं? ओडिशा में क्या होगा?

अमित शाह: देखिये, मेरा स्पष्ट मानना है कि ओडिशा विकास के मामले में पिछड़ता जा रहा है. इसके साथ-साथ ओडिशा की भाषा, ओडिशा की संस्कृति, ओडिशा का पहनावा, इसकी गरिमा पर भी गंभीर रूप से चोट हो रही है. और भारतीय जनता पार्टी मानती है कि किसी भी राज्य की भाषा-संस्कृति के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए. हर राज्य का विकास सबसे ज्यादा संभावनाओं का दोहन करके होना चाहिए, जो ओडिशा में नहीं हो रहा है. इसलिए हमने निर्णय किया है कि हम लोग अलग लड़ेंगे. मुझे पूरा विश्वास है कि इस बार ओडिशा की जनता मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी को आशीर्वाद देगी.

सवाल: आपने बड़ा नंबर दिया है लोकसभा चुनाव के लिए. राज्यसभा (राज्य के विधानसभा) के चुनाव को आप कैसे देखते हैं?

अमित शाह: देखिये इसके चुनाव में अभी काफी देर है. प्रत्याशियों की घोषणा दोनों ओर से बहुत लेट हुई है. मेरा एक ही दौरा हुआ है. थोड़ा एसेसमेंट आएगा. परंतु मैं इतना निश्चित रूप से कह सकता हू कि ओडिशा की जनता इस बार भारतीय जनता पार्टी को आशीर्वाद देगी.

सवाल: स्टेट के चुनाव में?

अमित शाह– जी.

सवाल: उत्तर प्रदेश में आपने अभी कहा कि आप सीटें बढ़ाएंगे पिछली बार से?

अमित शाह: उत्तर प्रदेश में सीटें बढ़ाएंगे मतलब, अगर सब कुछ अच्छा रहा तो 80 की 80 हो सकती हैं.

सवाल: ये तो बहुत ही बड़ा बयान है. आपका 2014 का रिकॉर्ड ब्रेक होगा?

अमित शाह: जी, हो सकता है हम सब कुछ अच्छा रहा तो 80 की 80 सीटें जीत सकते हैं.

सवाल: इसका मतलब आप अखिलेश जी को कन्नौज में हराएंगे, डिंपल यादव को मैनपुरी में हराएंगे. उनकी पूरी फैमिली फिरोजाबाद, आजमगढ़, बदायूं सब जगह?

अमित शाह: मैंने संभावना कहा है कि हम 80 की 80 जीत सकते हैं. हमारी सीटों की बढ़ोतरी होना निश्चित है.

सवालः राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जी का कभी हां कभी न… कभी लड़ रहे हैं. कभी नहीं लड़ रहे हैं. अभी ये सुनने में आ रहा है कि शायद अब नहीं लड़ रहे हैं. इसको कैसे देखते हैं आप?

अमित शाह: देखिये ये लोग अपना आत्मविश्वास गंवा बैठे हैं. अपनी पुश्तैनी सीट से भी लड़ने का आत्मविश्वास नहीं है. अगर नहीं ही लड़ना था तो इतने समय तक सीट क्यों पेंडिंग रखी. किसी कार्यकर्ता को दे देते तो कम से कम वह जनसंपर्क तो कर सकता था. ये कंफ्यूजन जो है, कहीं न कहीं आत्मविश्वास की कमी को दिखाता है.

सवाल: बिहार में देखा गया है कि जो तेजस्वी और जो गठबंधन इनके साथ लड़ रहा है कि वह इस बार कुछ सीटों पर कुशवाहा वोट काटने की कोशिश कर रहा है?

अमित शाह: कोई सवाल ही पैदा नहीं होता.

सवाल: तो बिहार में आप कॉन्फिडेंट हैं कि आप रिपीट करेंगे?

अमित शाह: जी

सवाल: साउथ इंडिया में एक बार चलते हैं. इस बार आप लोगों ने वहां बहुत समय बिताया. प्रधानमंत्री ने वहां बहुत दौरे किए. आपने खुद पर्सनली वहां पर बहुत दौरे किए. आपके बयान भी बहुत बड़े-बड़े हैं. तो साउथ इंडिया को पूरा ले लें, तो 129- 130 सीटों में आप कितनी सीटें देखते हैं?

अमित शाह: देखिये साउथ के चारों राज्यों को मिलाकर हम कांग्रेस से तो आगे ही जाएंगे.

सवालः कुल मिलाकर कितनी सीटें? क्या केरल-तमिलनाडु में खाता खुलेगा?

अमित शाह: हम बहुत अच्छा चुनाव लड़े हैं. खाता तो निश्चित रूप से खुलेगा. परंतु सीटों का अनुमान लगाना वहां इसलिए दिक्कत है कि बड़ी कांटे की टक्कर हुई है.

सवाल: दोनों प्रदेशों में. मतलब तमिलनाडु में भी खुलेगा केरल में भी?

अमित शाह: केरल में भी.

सवाल: तेलंगाना और आंध्र को कैसे देखते हैं आप?

अमित शाह: आंध्र प्रदेश में हमारा एलायंस हैं. हम बहुत अच्छा चुनाव लड़ रहे हैं. अभी शुरुआत है. और तेलंगाना में तो हम लोकसभा में बहुत अच्छा परफॉर्मेंस देंगे. अब तक की अधिकतम सीट हम वहां से जीतेंगे.

सवाल: इस चुनाव के पहले दो मुख्यमंत्री गिरफ्तार हुए. केजरीवाल जी अरेस्ट हुए, वह तो अभी भी मुख्यमंत्री हैं. हेमंत सोरेन जी भी अंदर हैं. तो आज सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से गिरफ्तारी की टाइमिंग पर सवाल उठाया है. तो इसको आप कैसे देखते हैं?

अमित शाह: नहीं देखिये ईडी सुप्रीम कोर्ट के सामने एक्सप्लेन करेगी. मगर मैं बताना चाहता हूं कि ये 19 समन के बाद हाजिर नहीं हुए. पहले समन में अगर आए होते तो चुनाव के छह महीने पहले अरेस्ट हो जाते. 19 बार समन दिया गया वह आए ही नहीं.

सवाल: अब उनकी धर्मपत्नी सुनीता केजरीवाल जी कह रही हैं कि उनको इन्सुलिन नहीं दिया जा रहा है. वहां पर उनको ठीक से रखा नहीं जा रहा है. यह उनको मारने की साजिश है?

अमित शाह: तिहाड़ जेल दिल्ली सरकार के अंतर्गत आती है, जिसके मुख्यमंत्री केजरीवाल जी हैं. तो क्या अपने को मारने की साजिश वह स्वयं कर रहे हैं.

सवाल: वह कह रहे हैं कि डीजी प्रिजंस दिल्ली पुलिस को रिपोर्ट करते हैं?

अमित शाह: जरा भी नहीं. प्रिजन सीधा दिल्ली सरकार को रिपोर्ट करता है.

सवाल: इसमें आपका कोई?

अमित शाह: कोई सवाल ही पैदा नहीं होता.

सवाल: ईवीएम पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया. विपक्ष ईवीएम के बारे में बहुत सालों से बात कर रही है. हर बार नारा लगाती है कि बीजेपी सिर्फ ईवीएम की वजह से चुनाव जीतती है. अब आप लोग वन नेशन- वन इलेक्शन की बात कर रहे हैं. ये लोग ईवीएम की बात कर रहे हैं. आप क्या ये कर पाएंगे वन नेशन- वन इलेक्शन?

अमित शाह: मैं पहले एक बात स्पष्ट कर दूं. राहुल गांधी जी जो बोलते हैं, वह सोच-विचार कर नहीं बोलते हैं. अगर हम ईवीएम के कारण जीतते हैं तो तेलंगाना में क्यों हारे? तमिलनाडु में क्यों हारे, केरल में सालों से क्यों हार रहे हैं? हिमाचल में क्यों हारे? बंगाल में क्यों हारे? या तो राहुल गांधी को स्पष्ट करना चाहिए कि ईवीए से आए नतीजों में हम जीतते हैं तो भी शपथ नहीं लेंगे. जीतते हैं तो नए कपड़े पहनकर शपथ ले लेते हैं और हारते हैं ईवीएम पर ठीकरा फोड़ते हैं. किस प्रकार की राजनीति है भई ये. जब आप जीतते हो तब ईवीएम सही है, जब हारते हो तो ईवीएम नकारा है. क्या देश की जनता ये सब नहीं समझती क्या? देश की जनता इसको समझती है. मगर मुझे तो आश्चर्य हो रहा है कि इतनी बड़ी पार्टी अपने नेता के सलाहकार क्यों नहीं बदलती. मैं दूर से देखता हूं मुझे आश्चर्य होता है. खैर छोड़िये, ये उनकी पार्टी का सवाल है. वन नेशन-वन इलेक्शन हमारे संकल्पपत्र का मुद्दा है और हम उसको जमीन पर उतारने का पूरा प्रयास करेंगे.

सवाल: तो अगला चुनाव 2029 वन नेशन वन इलेक्शन होगा?

अमित शाह: देखिये ये तो संसद को निर्णय करना है. मगर भारतीय जनता पार्टी जरूर प्रयास करेगी और उसको जमीन पर उतारेगी.

सवालः कुछ अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी बात करते हैं. वाशिंगटन पोस्ट पर एक आर्टिकल आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि हमारी इंटेलिजेंस एजेंसी रॉ प्लॉट कर रही थी यूएस में कुछ टेररिस्ट को मारने का. और उन्होंने कहा है कि ये मोदी सरकार का डार्क साइड है.

अमित शाहः देखिये इतनी गंभीरता से मीडिया के रिपोर्ट के आधार पर नहीं सोचना चाहिए. अगर कोई ठोस आरोप है तो एजेंसियां उसका जवाब देंगी. अगर कोई सरकार डिप्लोमेटिक मेथड से हमारे साथ चर्चा करती है, तो हम उसका जवाब देंगे.

सवालः कनाडा में निज्जर के मर्डर पर भी बात हुई थी.

अमित शाहः ऐसे आरोप मीडिया में लगने से मैं नहीं मानता कोई गंभीर सवाल खड़े होते हैं.

सवालः इसी से जुड़ा गार्डियन में एक और रिपोर्ट आई थी. उसमें था कि पाकिस्तान में 20 आतंकवादियों को इंडिया ने, फिर रॉ की बात थी कि कुछ लोगों का इस्तेमाल करके वहां पर आतंकियों को वहां पर मारा. पाकिस्तानी सरजमीं में. इसको लेकर आप क्या कहेंगे?

अमित शाहः देखिये किसने मारा. ये तो ढूंढने का सवाल है. परंतु मैं इतना निश्चित रूप से मानता हूं कि ये तो एक्सपोज़ हो ही गया कि पाकिस्तान की मिट्टी पर भारत में आतंक फैलाने वाले लोग थे.

सवालः प्रधानमंत्री भी ये कह रहे हैं. आपके कई वरिष्ठ नेता भी कह रहे हैं कि अब यह भारत वह भारत नहीं रहा जो खड़ा होकर साइड से तमाशा देखेगा. यह भारत घर में घुसकर मारता है. इस पर आपका क्या विचार है?

अमित शाहः निश्चित रूप से सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के बाद पूरी दुनिया यह समझ गई है कि भारत की सीमा और भारत की सेना के साथ छेड़खानी नहीं करते हैं, वरना जवाब मिलता है.

सवालः ये वेस्टर्न प्रेस में पिछले कुछ महीनों से तमाम आर्टिकल आ रहे हैं जो कि भारत में इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी, तानाशाही तमाम तरह की बातें करते हैं. इसको आप कैसे देखते हैं? ये इलेक्शन के समय ये जो बार-बार आता है क्या आप इसमें कोई साजिश देखते हैं?

अमित शाहः साजिश-वाजिश छोड़ दीजिए. मैं बड़े गौरव और विश्वास के साथ यह कह रहा हूं कि हमारा लोकतंत्र, हमारी लोकतांत्रिक पद्धति और हमारा चुनाव… तीनों दुनिया में सबसे पारदर्शी, सबसे ज्यादा विश्वसनीय है.

सवालः क्या बीजेपी कश्मीर में चुनाव लड़ेगी? आपने कहा है कि आप वहां पर आवाम का दिल जीतना चाहते हैं. तो यह सीधा सवाल है इसका आप क्या जवाब देंगे?

अमित शाहः अभी पार्टी ने तय नहीं किया है. पार्टी तय करेगी. परंतु हम जम्मू में परंपरागत रूप से लड़ते ही रहे हैं.

सवालः कांग्रेस एक बात और कह रही है. इसको लोकतंत्र की हत्या करार दे रही है. कह रही है कि मुकेश दलाल निर्विरोध चुन लिए गए हैं सूरत से, अभी इंदौर में भी ऐसा हुआ है.

अमित शाहः देखिये इस देश में 37 लोग निर्विरोध चुने गए हैं. और उनमें से सबसे ज्यादा कांग्रेस के चुने गए हैं. तब तो कांग्रेस ने ऐसा नहीं कहा. हर पार्टी को अपने अच्छे कार्यकर्ता को टिकट देना चाहिए. अब कांग्रेस पार्टी जबरदस्ती अपने कार्यकर्ता को टिकट देती है और कार्यकर्ता हार देखकर मैदान से भाग जाता है. तो इसमें भारतीय जनता पार्टी क्या कर सकती है भई. इनके उम्मीदवारों को टिकाने का काम हमारा नहीं, उनका है.

सवालः अभी एक और मुद्दा आ चुका है, जो है कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो एक भारत विरोधी सभा अटेंड कर रहे थे, जहां पर खालिस्तान नारे लगे. वहां पर प्रधानमंत्री और कुछ कैबिनेट मंत्रियों के पोस्टर लगे थे, जिसको कि कहा कि ये वॉन्टेड हैं. इसको आप कैसे देखते हैं.

अमित शाह: भारत सरकार ने वहां के राजदूत (उच्चायुक्त) को समन किया था और उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है. नाराजगी भी हमारी ओर से व्यक्त की गई है.

सवाल: तो इस पर कोई और कार्रवाई?

अमित शाहः नहीं… इसका जवाब आने के बाद आगे बात होगी.

सवाल: आप इतने दौरे कर रहे हैं. आप आज तीन अलग-अलग प्रदेशों से यहां आए हैं. उसके बाद आपने हमें इतना समय दिया. मैंने सुना है कि कल भी तीन राज्यों में आप जा रहे हैं. इस तरह का पनिशिंग शेड्यूल आप कैसे मैनेज करते हैं. काफी महीनों से आप कर रहे हैं?

अमित शाह: सालों से आदत है भई. कार्यकर्ता था तब छोटे स्तर पर काम करता था, तब भी दौरे होते थे, राज्य के होते थे. अब देश के होते हैं.

सवाल: अपोजिशन की नींद उड़ाने के लिए आप जाने जाते हैं. आप सो पाते हैं या नहीं?

अमित शाह: मैं कभी निगेटिव सोच के साथ काम नहीं करता. मैं अपनी पार्टी को जिताने के लिए काम करता हूं. हां… इससे किसी की नींद उड़ती है तो वह उनकी प्रॉब्लम है. पार्टी को जिताना, पार्टी के लिए काम करना. यह मेरा दायित्व है और मैं उसको बहुत अच्छी तरह से करता हूं.

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