फ्रेस्नो में बनेगा जसवंत सिंह खालरा के नाम पर पहला सरकारी स्कूल, मानवाधिकारों के संघर्ष को मिलेगा सम्मान

फ्रेस्नो में बनेगा जसवंत सिंह खालरा के नाम पर पहला सरकारी स्कूल, मानवाधिकारों के संघर्ष को मिलेगा सम्मान

जसवंत सिंह खालड़ा के नाम पर वोट करते हुए सदस्य। - Dainik Bhaskar

कैलिफोर्निया के फ्रेस्नो में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है, जहां नए बन रहे सरकारी एलीमेंट्री स्कूल का नाम दिवंगत मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के नाम पर रखा जाएगा। यह फैसला मंगलवार को फ्रेस्नो के सेंट्रल यूनिफाइड स्कूल डिस्ट्रिक्ट (सीयूसीडी) की बैठक में लिया गया। अगर यह नामकरण लागू होता है, तो यह अमेरिका में पहला सरकारी स्कूल होगा, जिसका नाम किसी सिख के नाम पर रखा गया है।

इस बैठक में 7 सदस्य थे, जिनमें से 6 ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि एक सदस्य ने मतदान से परहेज किया। सेंट्रल यूनिफाइड स्कूल बोर्ड के चेयरमैन नैनदीप सिंह चन्न ने कहा कि यह निर्णय बहुत महत्वपूर्ण है और यह अमेरिका में एक सिख मानवाधिकार कार्यकर्ता की पहचान को सम्मानित करने का एक ऐतिहासिक कदम है।

सितंबर 2025 में उद्घाटन

स्कूल का निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है और इसे सितंबर 2025 तक तैयार किया जाएगा। फ्रेस्नो में पहले ही खालरा के नाम पर एक पार्क मौजूद है, और वहां के लोग उनके मानवाधिकारों के संघर्ष को पूरी तरह से जानते और सम्मानित करते हैं। यह सम्मान केवल सिख समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य समुदाय भी उनकी मानवीय कार्यों को सराहते हैं।

पत्नी ने खुशी जाहिर की

खालरा की पत्नी परमजीत कौर खालरा ने कहा कि यह उनके लिए गर्व का पल है। उन्होंने कहा, “यह सचमुच एक दिल छूने वाली बात है कि अमेरिका में एक सरकारी स्कूल का नाम उनके पति के बलिदान और मानवाधिकारों के संघर्ष के लिए रखा जा रहा है।”

जसवंत सिंह खालरा का संघर्ष

जसवंत सिंह खालरा 1980 और 1990 के दशक के दौरान पंजाब में सिखों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों और मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक साहसी मानवाधिकार कार्यकर्ता थे। उन्होंने पंजाब पुलिस द्वारा सिख युवाओं के खिलाफ की गई गुमशुदगी, हत्याओं और शवों के गुप्त अंतिम संस्कार की घटनाओं को उजागर किया था।

1995 में हत्या

1995 में, खालरा को उनकी जान से हाथ धोना पड़ा जब उन्हें पुलिस ने उनके घर से अपहरण कर लिया, और बाद में उन्हें प्रताड़ित कर उनकी हत्या कर दी। इस मामले में एफआईआर नहीं दर्ज की गई, लेकिन खालरा की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद सीबीआई ने जांच शुरू की और चार पुलिसकर्मियों को उनके हत्या में दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सजा दी।

यह नामकरण निर्णय जसवंत सिंह खालरा के संघर्ष और बलिदान को मान्यता देने और उनके कार्यों को सम्मानित करने का एक बड़ा कदम है।

Leave a Comment

और पढ़ें