दीक्षा बिष्ट/हल्द्वानी: हिंदू धर्म में पूजनीय माने जाने वाला रुद्राक्ष को आयुर्वेद में चिकित्सीय गुणों की खान माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार रुद्राक्ष मानसिक स्वास्थ्य को बरकरार रखने के साथ ही हृदय रोगों तथा अन्य कई प्रकार की शारीरिक समस्याओं को दूर करने में सक्षम होता है. रुद्राक्ष को आयुर्वेद में महाऔषधि और संजीवनी नाम से जानते हैं. इसका उपयोग आदिकाल से ही विभिन्न प्रकार के शारीरिक और मानसिक रोगों के निवारण के लिए किया जाता रहा है.
रुद्राक्ष को उत्तम औषधी की श्रेणी में रखा जाता है, जिसे सिर्फ धारण करने भर से ही कई समस्याओं में फायदा मिलता है. हिंदू धर्म में प्रार्थना माला के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले रुद्राक्ष के फायदों और आयुर्वेदिक औषधियों में उसके उपयोग के बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए पूर्व आयुर्वेद अधिकारी डॉक्टर आशुतोष पंत ने बताया कि अलग-अलग प्रकार के रुद्राक्षों के उपयोग से कई जटिल समस्याओं को 4-5 दिनों में जड़ से दूर किया जा सकता है.
इस्तेमाल का तरीका और मिलने वाले लाभ
डॉक्टर पंत ने बताया कि रोजाना रुद्राक्ष का सेवन करने से आपको 4-5 दिनों में अपने स्वास्थ्य पर अंतर दिखाई देगा. उन्होंने बताया कि रुद्राक्ष के पाउडर और ब्रह्मी को मिलाकर उसका सेवन करने से मिर्गी के रोग में फायदा होता है. रुद्राक्ष को दूध में उबालकर प्रतिदिन, दिन में एक बार इसका सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है. रुद्राक्ष को रात भर गुलाब जल में भिगोकर रखें, इस जल का उपयोग आंखों के संक्रमण को दूर करने के लिए आई ड्रॉप्स की तरह से किया जा सकता है.
पहनने से भी होते हैं कई लाभ
हाथ में ब्रेसलेट और गले में रुद्राक्ष पहनने से बेचैनी तथा घबराहट दूर होती है. रुद्राक्ष को रात भर तांबे के बर्तन में पानी में भिगो कर रखें और सुबह इस पानी का सेवन करें. इस जल के सेवन से मधुमेह के लक्षणों में कमी आती है.
FIRST PUBLISHED : June 24, 2024, 19:02 IST










