भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्तों की दीवार में फंसी एक मां: सना की कहानी

भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्तों की दीवार में फंसी एक मां: सना की कहानी


बेटी भारत में, बच्चे पाकिस्तानी नागरिक; सरकार के फरमान ने बढ़ाई परिवार की पीड़ा

मेरठ की रहने वाली सना और उसका परिवार इस समय गहरे तनाव में हैं। सना की मां जुबैदा गहरे दर्द में कहती हैं, “हमने कोई गुनाह तो नहीं किया, जो ये परेशानी उठानी पड़ रही है। बेटी की शादी पाकिस्तान में की, रिश्तेदारी निभाई, मगर अब वही रिश्ता हमारी परेशानी बन गया है।”

क्या है मामला?

सना की शादी 2020 में पाकिस्तान के कराची निवासी और रिश्ते में फूफा के बेटे डॉ. बिलाल से हुई थी। शादी के बाद वह अपने बच्चों के साथ पाकिस्तान में ही रहती थीं। अप्रैल 2024 में वह एक पारिवारिक शादी के लिए मेरठ आईं — अपने मायके। उनके साथ उनके दो छोटे बच्चे भी थे, जो पाकिस्तान में पैदा हुए और पाकिस्तानी नागरिक हैं। सना खुद भारतीय नागरिक हैं और उन्हें अब तक पाकिस्तानी नागरिकता नहीं मिल सकी है क्योंकि पाकिस्तान का नियम है कि शादी के 9 साल बाद ही नागरिकता दी जाती है।

क्या हुआ बॉर्डर पर?

25 अप्रैल को सना अपने बच्चों के साथ पाकिस्तान लौटने के लिए बाघा बॉर्डर पहुंचीं, लेकिन भारतीय सेना ने उन्हें रोक दिया। उन्हें बताया गया कि वह भारत से पाकिस्तान नहीं जा सकतीं, हालांकि उनके बच्चों को अकेले पाकिस्तान भेजा जा सकता है। इस फैसले से सना टूट गईं। आखिर वह एक मां हैं — अपने छोटे बच्चों को अकेले कैसे भेजतीं?

क्यों बनी यह स्थिति?

कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने सख्त रुख अपनाया और पाकिस्तान के नागरिकों को 48 घंटे में भारत छोड़ने का आदेश दिया। ऐसे में सना की स्थिति और जटिल हो गई। भारतीय नागरिक होते हुए वह पाकिस्तान नहीं जा सकतीं, और उनके बच्चे पाकिस्तानी नागरिक होते हुए भारत में नहीं रह सकते।

अब सना कहां है?

सना फिलहाल दिल्ली में अपनी खाला के घर पर हैं। मां जुबैदा कहती हैं, “यहां बेटी को रखना भी मुश्किल हो रहा है। दो छोटे बच्चे हैं, पूरा परिवार परेशान है। हम सरकार से सिर्फ यही चाहते हैं कि सना को अपने पति और बच्चों के पास पाकिस्तान लौटने दिया जाए।”

क्या कहता है कानून?

इस मामले में कानूनी पेंच यह है कि सना भारत की नागरिक हैं और उनके बच्चे पाकिस्तान के। वीजा और नागरिकता के नियमों के अनुसार, दोनों देशों के बीच संबंध बिगड़ने पर यात्रा पर पाबंदियां लग जाती हैं। हालांकि मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह एक मां और उसके बच्चों को अलग करने जैसा है।

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