रिपोर्ट- नीरज कुमार
बेगूसराय. मूंग की खेती ज्यादा कठिन नहीं. लेकिन ठीक जानकारी न होने के कारण किसान इसका लाभ नहीं ले पाते हैं. अगर वैज्ञानिकों की सलाह के मुताबिक काम करें तो दो महीने में ही मूंग की बेहतरीन फसल ले सकते हैं. उसके बाद उसी जमीन पर धान की पैदावार भी हो सकती है.
भारत में मूंग की खेती पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर होती है. यहां के किसान मूंग की 10 से ज्यादा वैरायटी की खेती करते हैं. मूंग की खेती वैसे तो बिहार में भी होती है, लेकिन परंपरागत तौर-तरीका होने के कारण खेती में समय ज्यादा और उत्पादन कम होता है. अगर आप सिर्फ दो माह में मूंग की खेती कर खाली खेत में धान की भी खेती करना चाहते हैं, तो तैयार हो जाएं. कम लागत में गर्मी के समय में ज्यादा मुनाफा लेने का तरीका ढूंढ़ लीजिए. मूंग विशेष दलहनी फसलों में से एक है. यह खेत में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाती है. जिससे दूसरी फसलों को भी फायदा मिलता है.
60 दिन में मूंग की दो किस्में
किसान अगर मई के पहले सप्ताह में मूंग की खेती करना चाहें और फिर उसी खेत में धान की फसल भी लगाना चाहें, तो उनकी इस समस्या का भी समाधान है. कृषि विज्ञान केंद्र खोदावंदपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. रामपाल ने बताया विशाल या फिर पीपीएम 44 ब्रांड मूंग की उन्नत किस्म है. किसान इसे लगा सकते हैं. यह फसल लगभग 60 दिन में पककर तैयार हो जाती है. 8-10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर का उत्पादन भी हो जाता है. इस वैरायटी की मूंग लगाने के बाद किसान धान की फसल भी इसी खेत में लगा सकते हैं.
ऐसे करें खेती की तैयारी
बेगूसराय जिले के किसान रामनाथ महतो, प्रमिला देवी, शंभु सिंह और अन्य किसानों ने बताया बाजार में 70 रुपए किलो तक मूंग मिलती है. जबकि मूंग की दाल 150 रुपए प्रति किलो मिलती है. किसानों में मूंग की खेती के बारे में जानकारी का अभाव है. अगर मूंग की खेती करना चाहें तो वे अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र जाकर बीज प्राप्त कर सकते हैं.
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FIRST PUBLISHED : April 30, 2024, 14:56 IST










