हाथी-मानव द्वंद्व रोकने के लिए नई पहल, छत्तीसगढ़ राइडर्स क्लब ने उठाया जिम्मा, ऐसे कर रहे जागरूक

अनूप पासवान/कोरबाः- छत्तीसगढ़ प्रदेश घने जंगल और पहाड़ों से घिरा हुआ है. अगर बात करें कोरबा जिले की, तो यहां का जंगल बेहद ही समृद्ध है. यही कारण है कि यहां अनेकों प्रजाति के जंगली जीव-जंतु का बसेरा है. गजराज का कुनबा भी यहां खूब फल-फूल रहा है. लेकिन यहां सबसे बड़ी समस्या हाथी-मानव द्वंद्व की है, जिसको रोकने के लिए छत्तीसगढ़ शासन वन विभाग के द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है.

दौरा कर ग्रामीणों को किया जागरूक
ऐसा ही एक प्रयास फिर से कोरबा के कटघोरा वन मंडल क्षेत्र मे वन विभाग और छत्तीसगढ़ राइडर्स क्लब के तत्वाधान में किया गया. कटघोरा डीएफओ कुमार निशांत ने प्रदेश के बाइकर्स को बुलवाया. बाइकर्स के समूह में प्रदेशभर के इंजीनियर, डॉक्टर और विभिन्न फील्ड के जानकार शमिल थे. कटघोरा वन मंडल क्षेत्र के हाथी प्रभावित इलाके में उन्होंने दौरा किया. ग्रामीणों से मुलाकात कर उन्हें जागरूक करने का प्रयास किया. साथ ही ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए प्रचार-प्रसार किया गया.

ये भी पढ़ें:- अप्रैल से शुरू हो रहा नया वित्तीय वर्ष, बैंक और आईटीआर में क्या होंगे बदलाव? एक्सपर्ट ने दी जानकारी

जानवरों को पसंद आ रहा कोरबा का जंगल
कोरबा जिले पर प्रकृति अपनी रेहमत इस कदर बरसाई है कि यहां आने वाले हर एक प्राणी को सुकून की अनुभूति होती है. तभी तो इंसान हो या जंगली जानवर, यहां एक बार आने के बाद हर कोई यहीं का हो जाता है. दो दशक पूर्व उड़ीसा के रास्ते हाथियों ने छत्तीसगढ़ में अपनी दस्तक दी थी और चार हाथी कोरबा के जंगल में पहुंचे थे. हाथियों को कोरबा का जंगल इतना रास आया कि वह अब यहीं के होकर रह गए हैं. इन हाथियों को जंगल में बेहतर आवास मिल रहा है.

पिछले दो दशक के दौरान कोरबा में हाथियों के कुनबे में वृद्धि हुई है, लेकिन जंगल में विचरण के दौरान हाथियों की मौत भी हो रही है. जिसमें जंगल में करंट लगने या फिर अन्य घटनाएं सामने आई हैं. वनांचल क्षेत्र में बसने वाले ग्रामीण और हाथियों के बीच द्वंद्व कम करने के लिए वन विभाग द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है. वन विभाग द्वारा इसे रोकने की दिशा पर कई तरह के उपाय किए गए हैं.

Tags: Chhattisgarh news, Elephants, Korba news, Local18, Wild animals

Source link

Leave a Comment

और पढ़ें